मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंघर्षाभिव्यक्ति ९३ माला म्हारे दोवडी¹, सील बरत सिगार। अब के किरपा कीजियो, हूं तो फिर बाँधू तलवार ।।१६४।। कही कही इस पद के आगे निम्नाकित कुछ पक्तिया और भी मिलती हैं — रथा बैल जुताय के ऊटा कसिया भार। कैसे तोडूँ राम सूं, म्हारो भो भो² रो भरतार। राणो साड्यो मोकल्यो जाउँयो एके दौड। कुल की तारण अस्तरी, या तो मुरड चली राठौर। साड़िया पाछो फेरिया रे परत³ न देस्या पॉव। कर सूरापण नीसरी म्हांरे कुछ राणे कुण राव। ससारी निन्दा करै दुखियो सब ससार। कुल सारो ही लाजसी मीराँ जो भया ख्वार। राती माती प्रेम की विष भगत को मोड। राम अमल माती रहै धन मीरा राठौड। २ म्हारे हिरदे लिख्यो जी हरिनाम, अब नहि बिसरू। मै तो हिरदे लिखियो जी गोपाल, अब र्नहि बिसरू। हाथी घोडा बहो घणा माया केर न पार। राज तजूं चितौड को गामडी है असी हजार। साध हमारी आतमा मे साधन की देह। रोम रोम मे राम रह्या ज्यो बादर मे मेह। राती माती हरिनाम की बाँध भक्त को मोर। राम अमल साखी फिरै धन मीरा-राठोर। एक आडी गुरु गोविन्द खडा, एक आडी सब ससार। १ दुलडी, २ जन्मजन्मान्तर, ³ लौटकर।