मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
पृष्ठ 157, कुल 365 में से
संदर्भ में पढ़ें६८ मीरॉ-बृहद्-पद-संग्रह मीरॉरा ने गिरधर मलिया, नागर नन्द किसोर ।।१६८।।† अन्तिम दोनो पक्तियो का शेष पद से समन्वय नही होता। ६ राणी जी महलां से ऊतरी, ऊटा कसियो भार । डॉवो तो राणी छोडयो मेडतो, पूठ¹ दयी चित्तौड । म्हारा रे भाई ओठियाँ², मीराँ ने लाओ ए समझाय । घर को मानन- राणी रूस गयॉ राठोड । म्हारा रे भाई साड़िया³ रे बीर, जाजै सौ सौ कोस । म्हारा रे भाई साडिया, रे तेरो ऊट पाछो⁴ ले जाय । इण राणा जी रे राज मा, जल पिवा रो दोस । म्हारी एक न मानी बात, राणा रे, ले जाती बैकुठ माँहि । बागॉ मे बोली कोयल जी, बन मे दादुर मोर । मीराँ ने गिरधर मिलिया, नागर नन्द किसोर ।।१६९।।† भाव और भाषा के आधार पर इस पद को पूर्व पद (स० ५) का गेय रूपान्तर कहा जा सकता है । ७ काई थारो लागै छै गोपाल । गढ से तो मीराँ बाई उतर्र्या जी, हाथ मगद⁵ को थाल । औरा⁶ के तन अन धन लछमी, आप फिरो कगाल । ऊचा राणा जी रा गोखडा⁷ जी, नीची मीराँ बाई री साल⁸ । रमतां तो पायो मीरां कॉकरो, कोई सेवा सालिगराम । जहर पियालो राणा जी भेज्या, जी, द्यो मीराँ ने जाय । १ पीठ, २ पत्रवाहक, ३ ऊँट चलाने वाला, ४ लौटा कर । ५ मैदे से बना हुआ एक तरह का लड्डू विशेष जो पूजा के काम आता है, या लडकी के विवाह मे बनसारे मे दिया जाता है । ६ दूसरो के लिये, ७ अटारी, ८ कमरा ।