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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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संघर्षाभिव्यक्ति १०५ मोडो१ लख्यो असल गवाँर ओ राणा, पहेली तो लखतो बैकुँठा ले जाती ओ राणा। ॥१७६॥ † १४ सुत्या राणा जी नीस भरी नीद, सुत्यो राणा ने सुपणो भी आयो। थॉरी मीराँ मेडतणी भगवाँ लियो, मीराँ मेडतणी ए भगवाँ लियो । सुपणो तो है आल जजाल, मीराँ तो मेडतणी बैठी बाप के । उठो रे साथीडा कसलो घोडा जी, दिनडो उगास्याँ मीराँ जी के देस मे। चाल्यो राणा जी ढलती सी रात, दिनडो उगायो मीराँ जी के देसमे। खूँट्याँ टागो ए घुडला जी, तम्बूड़ा तना दो चम्पा बाग मे। आयो आयो साधुडारो साथ, मायँ२ तो मीराँ आवे घूमती ओ राम। छोडो ए मीराँ साधुडा रो साथ, लाजै पीहर और थॉरो सासरो। नही छोडों साधुडा रो साथ, भल लाजो पीहर और सासरो। ओढ़ो ए मीराँ दिक्खनी रा चीर*, भगवा तो बसतर ए छोड़ द्यो । बालूँ ए जालूँ थांरा दिक्खनी रा चीर, प्यारे लागे धोला बसतर । चुडलो तो पहरो ए हॉथी दाँत को, पहरो ए नोसर हार। चुडलो तो मोलूँ३ गढ के काँगरे, तोडूूं ए नोसर हार। आयी आयी राणा जी ने रीस,४ काढ कटारो मीराँ जी पर वायो।५ आयी आयी राणी जी ने रीस, एक मीराँ की सहस होय गयी ॥१७७॥† पदाभिव्यक्ति की महत्ता स्पष्ट ही है। मेडते से ही मीराँ ससार त्याग करती हैं। इस भावना की पुष्टि उपर्युक्त दोनो ही पाठो से होती है। प्रथम पाठ मे राणा द्वारा मीराँ को "मेड़तणी" सम्बोधित किया गया है, यह इस पद की विशेषता है। १ बहुत देर मे, २बीच मे, ३ फोडूूं, ४ क्रोध, ५ फेका।

  • दिक्खनीराचीर—दक्षिण मे बना हुआ वस्त्र जो अपनी बहुमूल्यता और सौन्दर्य के कारण राजस्थान मे विशेष प्रसिद्ध था अस्तु यह मुहावरा विशेष बढ़िया और बहुमूल्य वस्तु के लिये रूढ़िवाचक हो गया है।
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