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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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११२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह मीराँ पोवै मोतीडारो हार, भल गूँथे राखड़ी। फडूूँके म्हॉरी आंखडी। आज म्हॉरा प्रभु जी आया बनवास, फरूखै म्हारी आखँडी। यूँ कहै मीराँ बाई। इस पाठान्तर की एक पक्ति "ना म्हॉरो पियो दूर ना सासु लडी" विशेष विचारणीय है, क्योकि इससे मीराँ का सधवा होना सिद्ध होता है। पाठान्तर ३, (तू तो) सॉवड़ली गोरी नार, मारग बिच क्यो खडी। (मीराँ) कोई थॉरी दूषै छै आँख कै घरोँ सास लडी। (मीरा) कॉइ थॉरो पिया परदेस सदेसै यो पडी। (तू तो) चल्यो जा रे असल गँवार, तुझे तो मेरी क्या रे पडी। (तू तो) उड़ रे हरिया बनका सूवटा¹ तू तो उड रे द्वारिका मे जाय सॉवरिया ने कहियो ओलमा²। मीराँ क्याँ पर लिखोला³ सलाम⁴, क्याँ पर तो करडा⁵ ओलमा। सूआ चूँचा पै लिखूँली सलाम परैवा⁶ पै करडा ओलमा। मीराँ ग्यारसने करो जी निहार⁷ बारस ने खोलो पारनो⁸। मीराँ तेरस ने चालै दीनानाथ, चौदस ने हरि आ मिले। राणा थे छो म्हॉरा झूठा भरतार, साचा छै श्री हरि सॉवरा। यह पाठान्तर अन्य पदो से कुछ अलग पडता है। इसकी कुछ पक्तियाँ खडी बोली से प्रभावित है और शैली राजस्थानी लोक गीतो से। "सलाम" लिखने की जैसी अभिव्यक्ति राजस्थान के अन्य लोकगीतो मे भी मिलती है। मुगलो के विरुद्ध अपने कठिन विरोध के होते हुए भी १ तोता, २ शिकायत, ३ लिखोगी, ४ नमस्कार, ५ कठिन, ६ पख, ७ निराहार, ८ व्रत।