मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमिलन और बधाई राजस्थानी में प्राप्त पद १ म्हारा ओलगिया१ घर आया जी। तन की ताप मिटी सुख पाया, हिलमिल मगल गाया जी। घन की धुनि सुनि मोर मगन भया, यूं मेरे आणंद आया जी। मगन भई मिलि प्रभु आपणा सूं, मै कर दरध मिटाया जी। चंद को देखि कमोदणि फूले, हरखि भया मेरी काया जी। रग रग सीतल भई मेरी सजनी, हरि मेरे महल२ सिधाया जी। सब भगतन का कारज कीन्हा, सोई प्रभु मै पाया जी। मीराँ बिरहणी सीतल होई, दुख द्वन्द दूरी नसाया जी ॥२१५॥ २ सहेलिया साजन घर आया हो। बहोत दिना की जोवती३, बिरहिन पिव पाया हो। रतन करु नेछावरी, ले आरति साजू हो। पिया का दिया सनेसड़ा४, ताहि बहोत निवाजू हो। पांच सखी इकट्ठी भई, मिलि मगल गावै हो। पिय की रली५ बधावणा आंनन्द अंगि न मावै६ हो। १ परदेश रहता प्रियतम, २ अभिसार के लिये नियुक्त कक्ष विशेष के लिये रुढ़िगत मुहावरा, ३ प्रतीक्षा करती, ४ संदेश, ५ मलगमय, ६ समाये।