मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें“दासी” और “जन” प्रयोग युक्त पद राजस्थानी में प्राप्त पद १ तुमर कारण सब सुख छाड़्या, अब मोहिं क्यूं तरसावौ हो । बिरह बिथा लागी उर अन्तर, सो तुम आप बुझावौ हो । अब छोड़त नाहि बणै प्रभु जी, हँसि करि तुरत बुलावौ हो । मीराँ दासी जनम जनम की, अग से अग लगावौ हो ॥२६०॥ इस पाठ की भाषा पर खडी बोली का प्रभाव स्पष्ट है। पद की अभि- व्यक्ति के आधार पर ही ऐसा प्रतीत होता है कि सम्भवत पद की कुछ पूर्व पंक्तियाँ लुप्त हो गई है। “अब छोड़त नाहिं बणै प्रभु जी” अभि- व्यक्ति विचारणीय है। २ थांरी हूँ रमैया मोसूं नेह निभावौ । थारे कारण सब सुख छोड्या, हमकूं क्यू तरसावौ । बिरह बिथा लागी उर अन्दर, सो तुम आय बुझावौ । अब छोड़या नाहि बनै प्रभु जी, हँस कर तुरत बुलावौ । मीराँ दासी जनम जनम की, अंग सूं अग लगावौ ॥२६१॥ उपर्युक्त दोनों पदों मे गहरा साम्य विचारणीय है।- द्वितीय पद की भाषा राजस्थानी प्रधान है, जब कि पहले पद पर आधुनिक प्रभाव स्पष्ट है। यह पद पूर्व पद से अधिक पूर्ण भी प्रतीत होता है।