मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २०९ झूठा सब आभूषण री, साची प्रिया जी री प्रीति। झूठा पाट पटम्बरा रे, झूठा दीखनी चीर। साची पिया जी री गूदडी, जामे निरमल रहे सरीर। छप्पन भोग बुहाइ दे रे, ˙इन भोगिन मे दाग। लूण अलूणो ही भलो है, अपने पियाजी के साग¹। देखि विराणे निवाण कूं हे, क्यूं उपजावे खीज²। कालर³ आपणो ही भलो है, जामे निपज्वै⁴ चीज। छैल विराणे लाख को है, अपणे काज न होई। ताके सग सिधारता है, भला कहेसी न कोई। जाके सग सिधारता हे, भला कहे सन कोई। अविनासी सूं बालमा हे, जिन सूं साची प्रीत। मीराँ को प्रभु मिलिया हे, ऐसी ही भगति की रीत ॥३३७॥ पद से व्यक्त होती भावनाओ का अन्य भावाभिव्यक्ति से कोई समन्वय नही होता, पदाभिव्यक्ति मे भी सगति नही है। सम्भवत कीर्तन मडली का ही कोई गीत हो। १० राम मोरी बाहडली जी गहो। या भव सागर मझधार मे, थे ही निभावण हो। म्हारे ओगण⁵ धणा⁶ छै, हो प्रभु जी थे ही सहो तो सहो। मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, लाज बिदर की बहो। ॥३३८॥ कही कही प्रथम पंक्ति मे प्रयुक्त “राम” सम्बोधन के बदले “श्याम’ सम्बोधन भी मिलता है। १ मारवाडी का शब्द है ‘सागे’ जिसका अर्थ है ‘साथ’। यहाँ लय मिलाने के लिये ही ‘सागे’ का ‘साग’ हो गया हो, ऐसा प्रतीत होता है, २ क्रोध, ३ कुरूप, ४ उत्पन्न हो, ५ अवगुण, ६ बहुत। १४