भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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२३२ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह . काकरी दे मोरी गगरी गिराई, जोरी से बैया मरोरी । सखी कोई रीत न जाणे । मै दधि बेचन जात वृन्दावन वो सामे से आयो । दधि की मटकी सिर से गिराई लूट लूट दधि खाणे, सखी कोई मरम न जाणे । घायल की गति घायल जाणे, जे कोई निकसे जाणे । मीराँ को कह्यो बुरा न मानो, आखिर जात अहीर । सखी ये प्रीत न जाणे ॥३९३॥† पद के तीसरे अंश का शेष पद से समन्वय नही होता। श्री सूर्य- करण चतुर्वेदी जी के मतानुसार भी यह पद मीराँ का प्रतीत नही होता। ८ नन्द जी रे आज बधावणो छै । गहमह हुई रंग रावल मै, निरखि नैना सुख पावनो छै । भाभी जी, म्यो था सूं पूछां, आजिरो द्योस सुहावणो छै । मीराँ के प्रभु गिरिधर जनमिया, हुवो मनोरथ भावनो छै। ॥३९४॥† ९ हे री माँ नन्द को१ गुमानी, म्हारे मनडे बस्यो । गहे दुम डार कदम की ठाढ़ो, मृदु मुस्काय म्हारी ओर हंस्यो । पीताम्बर फटि काछनी काछे, रतन जटित माथे मुकुट कस्यो । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, निरख बदन म्हारो मनडो फस्यो । ॥३९५॥ १ नन्दा का पुत्र, 'नन्द को', 'नन्द का' आदि प्रयोग राजस्थानी भाषा की शैली मे प्राय प्राप्त होते हैं,