मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह पद की प्रथम और अन्तिम पंक्ति के निम्नांकित पाठान्तर भी मिलते हैं। “प्रथम पंक्ति . “जागो बसीवारे ललना, जागो मेरे प्यारे।” अन्तिम पंक्ति . “मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, तरण आया कूं तारे।” अभिव्यक्ति के विचार से इस अन्तिम पंक्ति का प्रथम पाठ ही उपयुक्त सिद्ध होता है। ९ तुम सो तो मन लाग रह्यो, तुम जागो मोहन प्यार। भोर भई चिडिया चह्चाई, कागा बोले कारे। कामनिया ने चीर सभाले, घर घर खुले किवारे। सारी गऊएँ निकसाई, यमुना लेकर संग ग्वाल रे। ग्वाल बाल सब द्वारे ठाडे, ठांई हार तिहारे। घर घर ग्वालन दही बिलोवे, कर कगन झनकारे। वस्त्र आभूषण तन पर धारो, पागियाँ पेच सवारे। या ब्रज के प्रभु भूषण तुम हो, तुम ही प्राण हमारे। मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, आयी शरण तिहारे ॥४१९॥† अन्तिम पंक्ति के द्वितीयाश का निम्नांकित पाठान्तर भी मिलता है। “तुम हो प्राण हमारे।” ऐसी स्थिति मे आठवी और नवी पंक्ति के द्वितीयाश एक ही हो जाते है । पाचवी पंक्ति का द्वितीयाश अर्थहीन् है। १० सखी मेरो कानूडो, कलेजे की कोर। मोर मुकुट पीताम्बर सोहै, कुडल की झकझोर । विन्द्रावन की कुज गलिन मे, नाचत नद किसोर। मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कंवल चितचोर ॥४२०॥†