मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २७१ • सास हठीली मारी ननद धुतारी, नाधड़े दीयरियो मूजने बढसे । मीराँ गावे प्रभु गिरधर ना गुन, चरण कमल चित हर से ॥४९०॥† ३५ ज्ञान कटारी मारी, अमने प्रेम कटारी मारी। मारे आँगणे रे रामजी तपसीओ तापे रे, काने कुडल जटाँधारी रे, राणाजी अमने। मकनोसो¹ हाथी रामजी, लाल अबाडी² रे, अँकुश दई दई हारी रे। खारा समुद्र माँ अमृत नाँ बहे लियुँ रे, ऐवी³ छे भक्ति हमारी रे। बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल बलिहारी रे ॥४९१॥† ३६ राखो रे श्याम हरि लज्जा मोरी, राखो श्याम हरि। भीम ही बैठे, अर्जुन ही बैठे, तेणे⁴ मारी गरज ना खरी। दुष्ट दुर्योधन चीरने खेचावे, सभा बीच खडी रे करी। गरूड चढीने गोविन्द जी रे आव्या, चीरना तो वाण भरी। बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण, चरणे आवे तो उबरी ॥४९२॥† ३७ ओ आवे हरि हसता सजनी, ओ आवे हरि हसता। मुझ अबला एकलडी जानी, पीताम्बर केड़े कसता। पचरगी पाघ केसरिया रे बाधा, फुलडा मेहेले तोरा।̂ १ मदमाता, २ हौदा, ३ ऐसी, ४ उनसे ।