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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २७९ पाठान्तर २, थाके दासी ही मनमानी, म्हाँसे अनबोलना हो राज। हमकं कहै सिगार उतारो, दृग अजन सबही धो डारो। माँथे तिलक लगावो, पहैरो चोलणा हो राज। कुबज्या कंवर कंस की दासी, ज्यां देखवाँ मोये आवत हाँसी। ज्यो पटराणी कीनी, हँस बोलणां म्हाराज। कुबज्या के संग भोग बनायो, हमको लिख कर जोग पठायो। मीराँ भई दिवानी, बन बन डोलणा हो राज।† ब्रजभाषा में प्राप्त पद १ तेरो कान्ह कालो हो भाई, मेरी राधे गोरी हो। ऐसी राधे रूप बनी, कंचन सी देह ठनी। ऐसो कारो कान्ह पर, कोटि राधे वारी हो। गोकुल उजार कीनो, मधुरा बसाय लीनी। कुब्जा कूं राज दीनो, राधे को बिसारी हो। बिनती सुनो ब्रजराज, लागूँगी तुम्हारे पाय। मीराँ प्रभु सों कहीयो जाय, सेवक तुम्हारी हो ।।५०१।।† इस पद मे भी भाव सामंजस्य नही है। "तेरो कान्ह ॰ ॰ ॰ ॰राधे वारी हो" प्रथमांश मे स्पष्ट है कि कथनोपकथन दो व्यक्तियो के बीच हो रहा है। “गोकुल उजार ॰ ॰ ॰ ॰बिसारी हो” वाला अंश एक शिकायत के रूप मे ही आता है जिसका प्रथमाश से कोई सबन्ध नही प्रतीत होता। छठी पंक्ति मे बिनती स्वय “ब्रजराय” को ही सुनायी गयी है, जब कि अन्तिम पंक्ति से यही स्पष्ट होता है कि “ब्रजराय” तक सदेशा पहुँचा देने की "बीनती" किसी अन्य से की जा रही है। एक ऐसा ही पद चन्द्रसखी के नाम पर भी पाया जाता है -