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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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संतमत-प्रभाव द्योतक पद ३०६ डाको नाम सुरत की डोरी, कड़ियाँ प्रेम चढाऊँ, ए माय । ज्ञान को ढोल बन्यो अति भारी, मगन होय गुण गाऊँ, ए माय । तन करूँ ताल मन करूँ मोरचंग सोती सुरत जगाऊँ, ए माय । नीरतं करूँ, मै प्रीतम आगे, तौ अमरापुर पाऊँ, ए माय । मो अबला पर किरपा कीज्यो, गुण गोविन्द को गाऊँ, ए माय । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, रज चरणा की पाऊँ, ए माय ।। ५५९ ।। पाठान्तर १, रसियो राम रिझाऊँ ए माइ, राम नाम मेरे मन बसियो । बिरहै पीड की बात सखी री, काँसूँ कहूँ समझाई । तन करि ताल र मन करि मिरदग, सुणतहि सुरति जगाऊँ ए माई । सील सिगार साज तन ऊपर, प्रभु के सनमुख जाऊँ, ए माई । लोक लाज कुल सक निवारी, राम जी मिल्या सुख पाऊँ ए माई । मीराँ के प्रभु तुमरे मिलन कूँ, चरण कमल बलि जाऊँ ए माई । ५ म्हाँरो जनम मरण रो साथी, थाँ ने नही बिसरूँ दिन राती । तुम देख्याँ बिन कल न पडत है, जानत मेरी छाती । ऊँची चढ चढ पंथ निहारुँ, रोय रोय अंखियाँ राती । यो ससार सकल जग झूठो, झूठा कुल रा न्याती । दोऊकर जोडया अरज करत हूं, सुण लीज्यो मेरी बाती । यो मन मेरो बड़ो हरामी, ज्यूँ मदमातो हाथी । सदगुरु हस्त धर्यो सिर ऊपर, अकुस दे समझाती । पल पल तेरा रुप निहारुँ, निरख निरख सुख पाती । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, हरि चरणा चित राती ।।५६०।। उपर्युक्त पद मे विभिन्न भावनाओ का समावेश हुआ है । वियोग, निर्वेद और मिलन तीनो भावनाओ की क्रमश अभिव्यक्ति हुई है । अतु. पूर्वापर सबंध मे असम्बद्धता आ गई है । “म्हाँरो” जनम

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