भारतकोश
मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

पृष्ठ 364, कुल 365 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 364

३१६ मीराँ-वृहद्-पद-संग्रह पाठान्तर १, पिर धीवी माया जल मे पड़ी। तू तो समझि सुहागण सुस्ता नृारि, पलक कमरे रामसू लगी लगनी लँहगो पहरि सुहागण, बीतौ जाई बिन्हार । धन जोवन दिन च्यार का जातन लागे बार । राम नाम को चुडलो पहरौ, सुमरण काजल सार । माला ल्यौ हरिनाम की उतारि चलौ पैली पार । ऐसा बरकौ कांई बसूजी, जनमत ही मर जाय । बर बरस्यौ म्हाँरो साँवरोजी अमर चूड़ा होइ जाय । जनमै मरै करै घर केता, बिखराता नर नारि । मीराँ रत्ती राम सूंजी, सावरियो भरतार ॥† पाठान्तर मे पूर्व पाठ का द्वितीयाश नही है। इससे मेरे उपर्युक्त कथन का समर्थन होता है। ४ मनखा जनम पदारथ पायो, ऐसी बहुरन आता । अब के मोसर १ ज्ञान बिचारो राम राम मुख गीता । सतगुरु मिलिया सुँज पिछानी, ऐसा ब्रह्म मै पाती । सगुरा सूरा अमृत पीवै, निगुरा प्यासा जाती । मगन भयो मेरो मन सुख मे, गोविन्द का गुण गाती । साहिब पाया आदि अनादि, नातर भव मै जाती । मीराँ कहै इक आस आप की, और सूं सकुचाती ॥५७४॥† पद की भाषा पर खडी बोली का प्रभाव स्पष्ट है । विचार- णीय बात है कि उपर्युक्त तीनो ही पदो की भाषा खडी बोली और ब्रज- भाषा दोनो ही से प्रभावित है । साथ ही तीनो की अभिव्यक्ति निर्वेद- द्योतक ही है। राजस्थानी मे प्राप्त कुछ पदो से भी निर्वेद की भावना झलकती है, तथाँपि अधिकांश पदाभिव्यक्तियाँ वियोगात्मक ही हैं। १ अवसर ।