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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

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भूमिका मीराँ के प्रामाणिक पदो के सग्रह का प्रयास इधर कुछ ही दिनो से चल पडा है। इससे पहले मीराँ के नाम से प्रसिद्ध अथवा मीराँ की छाप से युक्त प्राय सभी पद मीराँ रचित मान लिए जाते थे। बात यह थी कि तब तक मीराँ के पद भक्ति-भावना से युक्त साधारण-जनसमाज के लिए गेय पद मात्र थे, उन पदो मे कुछ काव्य-सौन्दर्य, कुछ उच्च भाव- विभूति, कुछ तन्मय कर देने की शक्ति का अनुभव विद्वत्समाज नही कर पाता था, क्योंकि तब तक विद्वत्समाज मे सरल और सहज भाषा मे सरल और सहज अनुभूतियो की सरल और सहज अभिव्यक्ति का महत्व विशेष नही था । ध्वनि-व्यजना और अलकार-वक्रोक्ति की अभ्यस्त सहृदयता ने अनलकृत सहज काव्य-सौन्दर्य की ओर से कुछ ऐसी आँखे मूद ली थी कि मीराँ के इन रससिक्त पदो मे भी हिन्दी के सहृदय कहे जाने वाले विद्वानो को कोई रस नही मिलता था। इसी कारण मीराँ के ये गेय पद साहित्य मे उपेक्षित ही रहे। परतु अब जब कि हिन्दी के कुछ सहृदय विद्वानो को मीराँ के पदो मे रस मिलने लगा है, जब शिक्षित समाज में मीराँ के पदो की चाह बढने लगी है, तब से विद्वानो के मस्तिष्क मे जिज्ञासा और संशय ने घर करना प्रारम्भ कर दिया है। जिज्ञासा ज्ञान- वृद्धि के लिए सबसे बडा वरदान है; इसी जिज्ञासा के वशीभूत हो विद्वान् गहन तत्वो की खोज मे निकल पडता है। मीराँ के प्रति जिज्ञासा की भावना उठते ही उनके पदो के सग्रह की रुचि बढने लगी, उनके जीवन- चरित सम्बंधी विविध प्रश्नो के उत्तर और विविध शकाओ के समाधान ढूंढे जाने लगे, साहित्य, इतिहास और जनश्रुतियो का मथन कर अनेक नयी बाते खोज निकाली गईं। जिज्ञासा के पश्चात् सशय की बारी आई और आधुनिक वैज्ञानिक बुद्धिवाद ने सशय उत्पन्न किया कि मीराँ के नाम से प्रसिद्ध सैकडो सरस और नीरस; साहित्यिक और अनगढ तथा बीहड, अनेक विचार-धारा और भाव-धारा की निर्झरणी तुल्य इन गेय पदो मे स्वय मीराँ की प्रामाणिक रचनाएँ कौनसी हैं और कितने दूसरो के पद मीराँ के नाम से चल पडे हैं। मीराँ के नाम से उपलब्ध पदों मे भाषा और भाव, विचार और अभिव्यक्ति की दृष्टि से इतनी भिन्नताएँ दृष्टिगोचर

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