मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१० मीरां-बृहद्-पद-संग्रह पावडी¹ पंगलियां चापसी² माला बुझै मन की बात । हरिदास दर्जी की बीनती जी, धोला³ वस्त्र सिमाओ जी । देर नगारो⁴ मीराँ चढ गयी, माता हियो मत हारो जी । बागा मे बोली कोयली, बन मे दादुर मोर । मीराँ ने गिरिधर मिलिया जी, र्नागर नन्द किशोर ॥७॥† उपर्युक्त पद से यह अज्ञात ही रह जाता है कि ऐसी दृढ अभि- व्यक्ति किसके प्रति हुई ? बहुत सम्भव है कि यह हरिदास दर्जी नामक कोई "रैदासी" सत ही मीराँ के गुरु "रैदास" हों । ८ कोई कछु कहो रे रग॰लाग्यो, रगलाग्यो भ्रम भाग्यो । लोग कहैं मीराँ भई बावरी, भ्रम दूनी ने खा गयो । कोई कहै रग लाग्यो ।- मीराँ साधा मे यूँ रम बैठी, ज्यूँ गूदड़ी मे तागो । सोने मैं सुहागो । मीराँ सूती अपने भवन में, सतगुरु आय जगा गयो । ज्ञानी गुरु आय जगा गयो ॥८॥† ९ थांने बरज बरज मैं हारी, भाभी मानो बात हमारी । राणे रोस कियो था ऊपर, साधो मे मत जारी । कुल को दाग लगै छे भाभी, निन्दा हो रही भारी । साधो रे सग बन बन भटको, लाज गमाई सारी । बड़ा घरां मे जन्म लियो छे, नाचो दै दै तारी । बर पायो हिंदुवाणै सूरज, अब बिदल मे काई धारी । मीराँ गिरधर साध सग तज, चलो हमारे लारी । १ खडाऊ या चप्पल, २ दबावेगी, ३ डंके की चोट,