मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमतभेद १५ मीराँ खीर खाड को भोजन त्याग्यो ये बाई, त्याग्यो दिखणी चीर राणा सो वर त्याग्यो ये बाई, सब संतन मे म्हारो सीर । ऊदाँ ॰ बास्या-कूस्या¹ टुकडा ये भाभी, और मिलेगी खाटी छार्य रो रो भूखा मरो ये भाभी, नही मिलेगो हरि आय । मीराँ बास्या तो कूस्या टूकड़ा ये बाई, पीस्यां खाटी छाय² । म्हे रोवा भूखा मरा ये बाई, जब रे मिलेगो हरि आय ॥१३॥† माया म्हे तो यूँ र तजी । १४ सुणजो जी थे भाभी मीराँ, थापे राणा जी कोप कियो छै जी । भाभी थारे मारणा कारणे, प्यालो हाथ लियो छै जी । उठ उठ भाजे रोस रो, या तो हाँथ खग लियो छै जी । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, इमरत पान कियो छै जी ॥१४॥† यह पद भी कोई स्वतन्त्र पद न होकर पद न० ११ की कुछ पंक्तियो का ही गेय रूपान्तर प्रतीत होता है। १५ अकोलो लाग्यो जी रग गिरधर को आन । गिरधर गिरधर काई करो, कोई गिरधर श्याम सुजाण । मीराँ तो चन्दा भई, कोई गिरधर उँग्यो भान । ऊदाँ थे तो बावली, कोई निहचै करल्यो ध्यान । आपा दोन्यू मिल भजा, कोई ज्यो गोप्योँ बिच कान³ । मीराँ ने गिरधर मिलिया जी, ममता रो राख्यो मान ॥१५॥† पदाभिव्यक्ति असंगत है। कीर्तन मडली मे प्राय ऐसे गीत मिलते हैं। प्राप्त इतिहास के आधार पर मीराँ की किसी ननद का नाम ऊदाँ बाई नही मिलता। भोजराज की चार बहने थी। १. कुवरबाई १ रूखा सूखा, २ छाँछ, मट्ठा, ३ कान्ह, कृष्ण।