मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंवियोगाभिव्यक्ति राजस्थानी में प्राप्त पद १ छोड मत जाज्यो जी महाराज, मै अबला बल नाहि गुसांई, तुम ही मेरे सिरताज । मै गुणहीन गुण नाहि गुसाँई, तुम समरथ महाराज । थॉरी होइ के किणरे¹ जाऊँ, तुम ही हिवडा² री साज³ मीराँ के प्रभु और न कोई, राखो अब के लाज । ॥२९॥ २ प्रभु जी थे कहाँ गया नेहडी लगाय, छोड गया बिस्वास सघाती,⁴ प्रेम की बाती⁵ बराय⁶ । बिरह समद⁷ मे छोड गया हो, नेह की नाव चलाय । मीराँ के प्रभु कब रे मिलोगे, तुम बिन रह्यो न जाय । ॥३०॥ पाठान्तर १, पिया ते कहाँ गयो नेहरा लगाय । छाँडि गयो अब कहाँ बिसोसी, प्रेम की बाती बराय । बिरह समुद्र मे छाडि गयो पिव, नेह की नाव चलाय । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, तुम बिनि रह्यो न जाय । १ कहाँ, २ हृदय का, ३ शृंगार ४ विश्वासघात करके, ५ दीप, ६ जलाकर, ७ समुद्र।