मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४० मीराँ-बृहद-पद-संग्रह १६ म्हारो मनडो लाग्यो हरि सूं, मै आज करूँ अतर सूँ । माधोरी मूरति पलक न बिसरूँ, सो ले हिरदै धरूँ । आवन कह गये अजहूँ न अये, बिन दरसण मे तरसूँ । म्हाँरो जनम सुफल होय, जादिन हरि के चरण परसूँ । मीरा के प्रभु दरसण दीज्यो, तन मन अरपण करस्यूँ । ॥४४॥ १७ म्हाँरो मन मोह्यो छै जी स्याम सुजाण । माधुरी मूरत सूरत सुन्दरी जाणे कोटिक भान¹ । कसूॅमल पाग केसर्यो जामो, सोहै कुडल कान । मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, तुम बिन तलफत प्राण । ॥४५॥ १८ बाई, म्हाँरे रावल भेष । वे स्याम बहो जटाधारी, अब ही अजन रेख । स्वेत बरण रग के कथा पहर्या, भिक्षा मागा देस । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, करहूँ अलख अलेख ॥४६॥+ पाठान्तर १, बाई, थाराँ नैन रावल भेख । बानी श्याम बोहो जटाधारी, अन्जन रेख । स्वेत अरुण कंथा बिराजत, माँगत देस । मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, करत करत अलेख ।† १. भानु, सूर्य ।