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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव द्वारा

DevanagariRajasthanipublished365 पृष्ठ

संतमत-प्रभाव द्योतक पद ३१७ ५ मै तो हरि चरणन की दासी, अब मै काहे को जाऊँ कासी । घट ही मे गगा, घट ही मे जमुना, घट घट है अविनासी । घट ही मे पुसकर औलेधेश्वर, लछिमन कबर बिलासी । जगेनाथ गगासागर है, साखी गुपाल ब्रजवासी । सेतु बध रामेश्वर ईश्वर मूलबटी सुर जासी । अवधपुरी मधुपुरी द्वारिका; चित्रकूट यमुना सी । गोवरधन गोकुल वृन्दावन, बीच मडल चौरासी । हरिद्वार कुरुखेत जनकपुर, गोदावरी हुलासी । तीरथ बडे प्रयाग गया जी, कासी तरुवर बासी । गिरिनार विन्ध्याचल सगिनार रंग है, सुघर कपिल दुखनासी । बदरी नाथ केदार गगोतरी, बैजनाथ कैलासी । पचबटी पपापुर रुक्मिणी, देव कपिल युवरासी । नैमषार श्रगीरिष मिसरिष, कासी पाप बिनासी । मुटुकनाथ अस मानसरोवर, भानलता अरु हाँसी । मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, सहज कटै यम फाँसी ॥५७५॥† पदाभिव्यक्ति सर्वथा अर्थहीन है। भाषा की दष्टि से भी यह विचारणीय है। प्रथम और अन्तिम पक्ति मे प्रयुक्त क्रियापदो के आधार पर भाषा खडी बोली स प्रभावित कही जा सकती है। शष सम्पूर्ण पद की भाषा को बोलचाल की भाषा कहा जा सकता है। ऐसे अर्थहीन पदो को प्रामाणिक सग्रह मे स्थान नही मिलना ही उपयुक्त होगा ।