मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)
Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary
महाकवि विशाखदत्त द्वारा
DevanagariSanskritpublished488 पृष्ठ
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विषयानुक्रमणिका
| विषय | पृष्ठ | |
|---|---|---|
| ( क ) भूमिका | ||
| १—काव्य के दो प्रधान रूप | ... | १ |
| २—नाटक का लक्षण तथा परिभाषा | ... | ४ |
| ३—कथावस्तु अथवा इतिवृत्त और उसके प्रकार | ... | ५ |
| ४—नाटकों का उद्भव | ... | १३ |
| ५—संस्कृत नाटकों के विकास का क्रमिक इतिहास | ... | १६ |
| ६—नाटककार विशाखदत्त का काल-निर्धारण | ... | २३ |
| ७—जीवन-वृत्त | ... | ३६ |
| ८—विशाखदत्त की शैली | ... | ४२ |
| ९—ग्रन्थ का नामकरण | ... | ४६ |
| १०—कथानक का मूल आधार | ... | ५० |
| ११—नाटक के पूर्व की कथा | ... | ५१ |
| १२—अंकानुसार संक्षिप्त कथावस्तु | ... | ५५ |
| १३—मुद्राराक्षस का नायक | ... | ७० |
| १४—प्रमुख पात्रों का चरित्र-चित्रण | ... | ७३ |
| १५—रस | ... | ८१ |
| १६—मुद्राराक्षस का वैशिष्ट्य | ... | ८३ |
| १७—मुद्राराक्षस में सुभाषितों का प्रयोग | ... | ८८ |
| १८—अकारादिक्रम से श्लोकों की सूची | ... | १०० |
| ( ख ) मूल ग्रन्थ और व्याख्या आदि | ||
| १—प्रथमोऽङ्कः | ... | १ |
| २—द्वितीयोऽङ्कः | ... | ६५ |
| ३—तृतीयोऽङ्कः | ... | १६३ |
| ४—चतुर्थोऽङ्कः | ... | २४१ |
| ५—पञ्चमोऽङ्कः | ... | २७७ |
| ६—षष्ठोऽङ्कः | ... | ३३६ |
| ७—सप्तमोऽङ्कः | ... | ३८६ |