मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपञ्चम अङ्क । ११७
मनुष्य ।—जो अमात्य की आज्ञा । ( बाहर जाता है आभरण लेकर आता है । ) अमात्य ! अलङ्कार लीजिए । राक्षस ।— ( अलङ्कार धारण कर के ) भद्र ! राजकुल में जाने का मार्ग बतलाओ । प्रतिहारी ।—इधर से आइए । ५ राक्षस ।—अधिकार ऐसी बुरी वस्तु है कि निर्दोष मनुष्य का भी जी डरा करता है । सेवक प्रभु सों डरत सदाही । पराधीन सपने सुख नाही ॥ जे ऊंचे पद के अधिकारी । तिन को मनही मन भय भारी ॥ सबही द्वेष बड़न सो करहीं । अनुचित कान स्वामि को भरहीं ॥ १० जिमि जे जनमे ते मरैं मिले अवसि बिलगाहि । तिमि जे अति ऊंचे चढ़, गिरि हैं संसय नाहि ॥
शत्रुओं से ऐसा घिर गया कि यदि उस के सिपाही साथ ही न पहुंचते तो वह टुकड़े २ हो जाता । ” यह मली देश ही मुद्राराक्षस का मलय देश है यह संभव होता है । यद्यपि अंग्रेजी वाले यह देश कहां था इस का कुछ वर्णन नहीं करते किन्तु हिन्दुस्तान से लौटते समय यह देश उस को मिला था, इस से अनुमान होता है कि कहीं बलूचिस्तान के पास होगा । आगे चल कर फिर लिखते हैं “नदियों के मुहाने पर पहुंचने के पीछे उस को एक टापू मिला, जिस को उसने शिकोस्तितिस Scillcustis लिखा है पर आरियन [आर्य] लोग उस टापू को किलूता Cillutta कहते हैं ।” क्या आश्चर्य है कि यहां कुलूत हो । वह लोग यह भी लिखते हैं कि चन्द्रगुप्त ने छोटेपन में सिकन्दर को देखा था और उस के विषय में उस ने यह अनुमति दी थी कि सिकन्दर यदि स्वभाव अपने वश में रखता तो सारी पृथ्वी जीतता । अब इन पुस्तकों से राजाओं के नाम भी कुछ मिलाइए । पर्व्वतेश्वर और बर्बर यह दोनों शब्द Barbarian बर्बरियन के कैसे पास हैं । काश्मीरादि देश का राजा जिस के पंजाब अति निकट है, पुष्कराक्ष ग्रीक लोगो के पोरस शब्द के पास है । पुष्कराज वा पुसकस और उस से पोरस हुआ हो तो क्या आश्चर्य है । प्युकैस्तम वा पुसैतस ( जो सिकन्दर के पीछे पारस का गवर्नर हुआ था ) भी पुष्कराक्ष के पास है किंतु यहां पारस का राजा मेघाक्ष लिखा है । इन राजाओं का ठीक, ठीक ग्रीक नाम या जो देश उन का विशाखदत्त ने लिखा उस को यूनानवाले