भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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छठा अंक

स्थान—नगर के बाहर सडक ।

( कपडा, गहिना पहिने हुए सिद्धार्थक आता है । )

सिद्धार्थक ।—

जलद नील तन जयति जय, केशव केशी काल ।
जयति सुजन जन दृष्टि ससि, चन्द्रगुप्त नरपाल ॥
जयति आर्य्य चाणक्य की, नीति सहज बल भौन ।
बिनही साजे सैन नित, जीतत अरि कुल जौन ॥

चलो आज पुराने मित्र समिद्धार्थक से भेट करें (घूमकर) अरे ! मित्र समिद्धार्थक आपही इधर आता है ।

( समिद्धार्थक आता है )

समिद्धार्थक ।—

मिटत ताप नहि पान सों, होत उडाह बिनास ।
बिना मोत के सुख सबै, औरहु करत उदास ॥

सुना है कि मलयकेतु के कटक से मित्र सिद्धार्थक आ गया है । उसी को खोजने को हम भी निकले है कि मिलै तो बड़ा आनन्द हो । ( आगे बढ़ कर ) अहा ! सिद्धार्थक तो यही है । कहो मित्र ! अच्छे तो हो ?

**सिद्धार्थक ।—**अहा ! मित्र समिद्धार्थक आप ही आगए । ( बढ़ कर )—कहो मित्र ! क्षेम कुशल तो है ?

( दोनों गले से मिलते हैं )

**समिद्धार्थक ।—**भला ! यहा कुशल कहा कि तुम्हारे ऐसा मित्र बहुत दिन पीछे घर भी आया तो बिना मिले फिर चला गया ।