मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१६० मुद्राराक्षस—
थोडि मास भख मरन भय, जियहि खाइ तृन घास ।
तिन गरीब मृगको करहि, निरदय ब्याधा नास ॥
(चारो ओर देख कर)
५ अरे भाई जिष्णुदास ! मेरी बात का उत्तर क्यो नही देते ? हाय ! ऐसे समय मे कौन ठहर सकता है।
च० दा०— [आसू भर कर] हाय ! यह मेरे सब मित्र बिचारे कुछ नही कर सकते, केवल रोते है और अपने को अकर्मण्य समझ शोक से सूखा सूखा मुह किये आसू भरी आखों से एक टक मेरी ही ओर देखते चले आते है।
१० दोनों चाडाल। अजी चन्दनदास ! अब तुम फासी के स्थान पर आ चुके इस से कुटुम्ब को बिदा करो।
च० दा० ।—(स्त्री से) अब तुम पुत्र को लेकर जाओ, क्योकि आगे तुम्हारे जाने की भूमि नही है।
स्त्री।—ऐसे समय में तो हम लोगों को बिदा करना उचित ही १५ है, क्योंकि आप परलोक जाते हैं, कुछ परदेश नहीं जाते (रोती है)।
च० दा० ।—सुनो मै कुछ अपने दोष से नही मारा जाता, एक मित्र के हेतु मेरे प्राण जाते हैं, तो इस हर्ष के स्थान पर क्यो रोती है ?
२० स्त्री।—नाथ ! जो यह बात है तो कुटुम्ब को क्यों बिदा करते हो ?
च० दा० ।—तो फिर तुम क्या कहती हो ?
स्त्री।—(आसू भर कर) नाथ ! कृपा कर के मुझे भी साथ ले चलो ।
२५ च०दा० ।—हा ! यह तुम कैसी बात कहती हो ? अरे ! तुम इस बालक का मुह देखो और इस की रक्षा करो, क्योंकि