भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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उपसंहार ( अक्षर ) ख । १६१

जस्टिन (Justin) कहता है—(१) सन्द्रकुत्तस महापराक्रमी था। असंख्य सैन्य संग्रह कर के विरुद्ध लोगों का इसने सामना किया था। डियोडारस सिक्यूलस (Deodorus Siculus) कहता है—(२) प्राच्यदेश के राजा जन्द्रमा के पास २०००० अश्व, २००००० पदाति, २००० रथ और ४००० हाथी थे। यद्यपि यह Xandramas शब्द चन्द्रमा का अपभ्रंश है, किन्तु कई भ्रान्त यूनानियों ने नन्द को भी इसी नाम से लिखा है। क्विन्तस करशिअस (Quintus Curtius) लिखता है—(३) चन्द्रमा के जौरकार पिता ने पहले मगध राज को फिर उस के पुत्रों को नाश कर के रानी के गर्भ से अपने उत्पन्न किए हुए पुत्र को गद्दी पर बैठाया। स्ट्राबो (Strabo) कहता है—४) सेल्युकस ने मेगास्थनिस को सन्द्रकुत्तस के निकट भेजा और अपना भारतवर्षीय समस्त राज्य देकर उस से सन्धि कर लिया। ओरियन (Orriun) लिखता है—(५) मेगास्थनिस अनेक बार सन्द्रकुत्तस की सभा मे गया था। प्लूटार्क (Plutarch) ने (६) चन्द्रगुप्त को दो लक्ष सेना का नायक लिखा है। इन सब लेखो को पौराणिक वर्णनों से मिलाने से यद्यपि सिद्ध होता है कि सिकन्दरकृत पुरुपराजय के पीछे मगधराज मन्त्री द्वारा निहत हुए और उनके लड़के भी उसी गति को पहुंचे और उसके पीछे चन्द्रगुप्त राजा हुआ, किन्तु बहुत से यूनानी लेखकों ने


(1) Justin His Phellipp Lib XV Chap IV
(2) Deodorus Siculus XVII 93
(3) Quintus Curtius IX 2
(4) Strabo XV 2 9
(5) Orriun Indica X 5
(6) Plutarch Vita Alexandri O. 62