भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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महाकवि विशाखदत्त का बनाया

मुद्राराक्षस नाटक ।


स्थान रङ्गभूमि ।


रंगशाला में नान्दी मङ्गलपाठ करता है।

भरित नेह नव नीर नित, बरसन सुरस अथोर ।
जयति अपूरब घन कोऊ, लखि नाचत मन मोर ॥१॥
'कौन है सीस पै' 'चन्द्रकला' 'कहा याको है नाम यही त्रिपुरारी' ।
'हा यही नाम है भूल गई किमि जानत हू तुम प्रान पियारी' ॥
'नारिहि पूंछत चन्द्रहि नाहिं' 'कहै विजया यदि चन्द्र लबारी' । ५
यों गिरिजै छलि गंग छिपावत ईस हरौ सब पीर तुम्हारी ॥२॥
पाद प्रहार सों जाइ पताल न भूमि सबै तनु बोझ के मारे ।
हाथ नचाइबे सों नभ मैं इत के उत टूटि परैं नहिं तारे ॥
देखन सो जरि जाहि न लोक न खोलत नैन कृपा उर धारे ।
यों थल के बिनु कष्ट सों नाचत शर्व हरौ दुख सर्व तुम्हारे ॥३॥ * १०


* संस्कृत का मंगलाचरण —
धन्या केयं स्थिता ते शिरसि शशिकला, किन्नु नामैतदस्या
नामैवास्यास्तदेतत्, परिचितमपि ते विस्मृतं कस्य हेतोः ।॥
नारी पृच्छामि नेन्दुं, कथयतु विजया न प्रमाणं यदिन्दु-
र्देव्या निह्नोतुमिच्छोरिति सुरसरितं शाठ्यमव्याद्विभोर्वः ॥१॥