भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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प्रस्तावना । २७

उपजै अच्छे खेत मे, मूरखहू के धान।
सधन होन मै धान के, चहिय न गुनी किसान ॥ ४ ॥
तो अब मै घर से सुघर घरनी को बुलाकर कुछ गाने बजाने का ढग जमाऊ (घूम कर) यही मेरा घर है, चलू । (आगे बढ़ कर) अहा ! आज तो मेरे घर मे कोई उत्सव जान ५ पड़ता है, क्योकि घर-वाले सब अपने अपने काम मे चूर हो रहे है।

पीसत कोऊ सुगन्ध कोऊ जल भरि कै लावत ।
कोऊ बैठि कै रंग रंग की माल बनावत ॥
कहु तिय गन हु कार सहित अति श्रवन सोहावत । १०
होत मुशल को शब्द सुखद जियको सुनि भावत ॥५॥

जो हो घर से स्त्री को बुला कर पूछ लेता हूं (नेपथ्य की ओर)

री गुनवारी सब उपाय की जाननवारी ।
घर की राखनवारी सब कुछ साधनवारी ॥
मो गृह नीति सरूप काज सब करन संवारी । १५
बेगि आउरी नटी बिलम्ब न करु सुनि प्यारी ॥६॥

(नटी आती है)

नटी।—आर्य्यपुत्र ! * मै आई, अनुग्रहपूर्वक कुछ आज्ञा दीजिये ।
सूत्र०।—प्यारी, आज्ञा पीछे दी जायगी, पहिले यह बता कि २० आज ब्राह्मणों का न्योता कर के तुम ने इस कुटुम्ब के लोगो पर क्यो अनुग्रह किया है ? या आप ही से आज अतिथि लोगो ने कृपा किया है कि ऐसे धूम से रसोई चढ़ रही है ?
नटी।—आर्य्य ! मै ने ब्राह्मणों को न्यौता दिया है । २५
सूत्र०।—क्यो ? किस निमित्त से ?


* संस्कृत मुहाविरे म पति को स्त्रिया आर्य्यपुत्र कह कर पुकारती हैं।