भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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३८ मुद्राराक्षस—

चाणक्य ।—( क्रोध से ) अरे ! कह, कौन अपना जीवन नही सह सकते, उन के नाम तू जानता है ?

दूत ।—जो नाम न जानता तो आप के सामने क्योंकर निवेदन करता ?

चाणक्य । - मै सुना चाहता हूं कि उन के क्या नाम है ?

दूत ।—महाराज सुनिये । पहिले तो शत्रु का पक्षपात करने वाला क्षपणक है ।

चाणक्य ।—(हर्ष से आप ही आप ) हमारे शत्रुओं का पक्ष पाती क्षपणक है ? ( प्रकाश ) उस का नाम क्या है ?

दूत ।—जीवसिद्धि नाम है ।

चाणक्य ।—तू ने कैसे जाना कि क्षपणक मेरे शत्रुओं का पक्ष पाती है ?

दूत ।—क्योंकि उस ने राक्षस मन्त्री के कहने से देव पर्वतेश्वर पर विषकन्या का प्रयोग किया ।

चाणक्य ।—( आप ही आप ) जीवसिद्धि तो हमारा गुप्त दू है ( प्रकाश ) हा, और कौन है ।

दूत ।—महाराज ! दूसरा राक्षस मन्त्री का प्यारा सखा शकट दास कायथ है ।

चाणक्य ।—( हँस कर आप ही आप ) कायथ कोई बडी बात नहीं है तो भी क्षुद्र शत्रु का भी उपेक्षा नही करनी चाहिए, इसी हेतु तो मैने सिद्धार्थक को उस का मित्र बना कर उस के पास रक्खा है, ( प्रकाश ) हा, तीसरा कौन है ?

दूत ।—( हँस कर ) तीसरा तो राक्षस मन्त्री का मानो हृदय ही पुष्पपुरवासी चन्दनदास नामक वह बड़ा जोहरी है जिस के घर मे मन्त्री राक्षस अपना कुटुम्ब छोड़ गया है ।

चाणक्य ।—(आप ही आप) अरे ! यह उस का बड़ा अन्तरग मित्र होगा, क्योंकि पूरे विश्वास बिना राक्षस अपना

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