मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंद्वितीय अंक ।
स्थान—राजपथ
( मदारी आता है )
**मदारी।—**अललललललल, नाग लाये सांप लाये ।
तन्त्र युक्ति सब जानही, मण्डल रचहि विचार ।
मन्त्र रक्षही ते करहि, अहि नृप को उपचार ॥
( * आकाश मे देख कर ) महाराज ! क्या कहा ? तू कौन है ? महाराज ! मै जीर्णविष नाम सपेरा हूं (फिर आकाश की ओर देख कर ) क्या कहा कि मै भी साप का मन्त्र जानता हूं खेलूंगा ? तो आप काम क्या करते हैं, यह तो कहिये ?
(फिर आकाश की ओर देख कर ) क्या कहा—मै राजसेवक हूं ? यो आप तो साप के साथ खेलते ही है । (फिर ऊपर देख कर ) क्या कहा, कैसे ? मन्त्र और जड़ी बिन मदारी और अंकुस बिन मतवाले हाथी का हाथीवान, वैसे ही नये अधिकार के संग्रामविजयी राजा के सेवक—ये तीनों अवश्य नष्ट होते हैं (ऊपर देख कर ) यह देखते २ कहा चला गया ? (फिर ऊपर देख कर ) क्या महाराज ! पूछते हो कि इन पिटारियों मे क्या है ? इन पिटारियों मे मेरी जीविका के सर्प हैं। (फिर ऊपर देख कर ) क्या कहा कि मै देखूंगा ? वाह वाह महाराज ! देखिये देखिये, मेरी बोहनी हुई, कहिये इसी स्थान पर खोलूं ? परन्तु यह स्थान अच्छा नही
* आकाश में देख कर' या 'ऊपर देख कर' का आशय यह है मानो दूसरे से बात करता है।