भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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६२ मुद्राराक्षस—

राक्षस ।—( हर्ष से ) क्या चन्द्रगुप्त मारा गया ? विराधगुप्त ।—देव ने न मरने दिया । राक्षस ।—( शोक से ) तो क्या फूल कर कहते हो कि सब कुछ किया ? ५ विराधगुप्त ।—उस ने औषधि मे विष मिला कर चन्द्रगुप्त को दिया, पर चाणक्य ने उस को देख लिया और सोने के बरतन मे रख कर उस का रग पलटा जान कर चन्द्रगुप्त से कह दिया कि इस औषधि में विष मिला है, इस को न पीना । १० राक्षस ।—अरे वह ब्राह्मण बड़ा ही दुष्ट है । हा, तो वह वैद्य क्या हुआ ? विराधगुप्त ।—उस वैद्य को वही औषधि पिला कर मार डाला । राक्षस ।—( शोक से ) हाय हाय ! बड़ा गुणी मारा गया ! १५ भला शयनघर के प्रबन्ध करनेवाले प्रमोदक ने क्या किया ? विराधगुप्त ।—उस ने सब चौका लगाया । राक्षस ।—( घबड़ा कर ) क्यों ? विराधगुप्त ।—उस मूर्ख को जो आप के यहा से व्यय को धन मिला था उस ने अपना बडा ठाट बाट फैलाया, यह देखतेही २० चाणक्य चौकन्ना हो गया और उस से अनेक प्रश्न किए, जब उस ने उन प्रश्नों के उत्तर अडबण्ड दिये तो उस पर पूरा सन्देह कर के दुष्ट चाणक्य ने उस को बुरी चाल से मार डाला । राक्षस ।—हा ! क्या देव ने यहा भी उलटा हमी लोगों को २५ मारा ! भला वह चन्द्रगुप्त को सोते समय मारने के हेतु जो राजभवन मे नीभत्सकादिक वीर सुरग मे छिपा रक्खे थे उन का क्या हुआ ?