मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतृतीय अङ्क । ७५
सो नृप नन्द हि पुत्र सह नासि करी हम पूर्ण । चन्द्रगुप्त राजा कियो, करि राक्षस मद चूर्ण ॥ तिमि सोऊ मोहि नीति बल, छलन चहत हति चन्द । पे मो आछुत यह जतन, वृथा तासु अति मन्द ॥ (ऊपर देख कर क्रोध से) अरे राक्षस ! छोड़ छोड़ यह ५ व्यर्थ का श्रम, देख— जिमि नृप नन्दहि मारि कै, वृषलहि दीनों राज । आइ नगर चाणक्य किय, दुष्ट सर्प सो काज ॥ तिमि सोऊ नृप चन्द्र सों, चाहत करन बिगार । निज लघु मति लाघ्यौ चहत, मो बल बुद्धि पहार ॥ १० (आकाश की ओर देख कर) अरे राक्षस ! मेरा पीछा छोड़ क्योंकि— राज काज मन्त्री चतुर, करत बिना अभिमान । जैसो तुव नृप नन्द हो, चन्द्र न तौन समान ॥ तुम कछु नहि चाणक्य जो, साध्यौ कठिनहु काज । १५ तासों हम सों बैर करि, नहि सरि है तुव राज ॥ अथवा इस मे तो मुझे कुछ सोचना ही न चाहिये । क्योंकि— मम भागुरायण आदि भृत्यन मलय राख्यो घेरिकै । तिमि गए सिद्धार्थक ऐहैं तेउ काज निबेरिकै ॥ अब लखहु करि छल कलह नृपसों भेद बुद्धि उपाइकै । २० पर्ब्बत जनन सों हम बिगारत राक्षस हि उलटाइकै ॥ कञ्चुकी ।—हा ! सेवा बड़ी कठिन होती है । नृप सों सचिव सों सब मुसाहेब गनन सों डरते रहै । पुनि विटहु जे अति पास के तिनकौ कह्यौ करते रहै ॥ मुख लखत बीतत दिवस निसि भय रहत सकित प्रानहै । २५ निज उदर पूरन हेतु सेवा श्वान वृत्ति समान है ॥