मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें८८ मुद्राराक्षस--
आज से हम सब काम काज आपही सम्हालेंगे' यह लोगों से कह दो।
कञ्चुकी।-- (आप ही आप) अरे ! आज महाराज ने चाणक्य के पहले आर्य्य शब्द नहीं कहा ! क्यों ? क्या सच ५ मुच अधिकार छीन लिया ? वा इस में महाराज का क्या दोष है।
सचिव दोष सों होत हैं, नृपहु बुरे तत्काल।
हाथीवान प्रमाद सों, गज कहवावत व्याल ॥
चन्द्रगुप्त ।--क्यों जी ? क्या सोच रहे हो ?
१० कञ्चुकी ।--यही कि महाराज को महाराज शब्द अब यथार्थ शोभा देता है।
चन्द्रगुप्त ।--(आप ही आप) इन्ही लोगों के धोखा खाने से आर्य्य का काम होगा। (प्रगट) शोणोत्तरे ! इस सूखी कलह से हमारा सिर दुखने लगा, इस से शयनगृह का १५ मार्ग दिखलाओ।
प्रतिहारी।--इधर आवें महाराज, इधर आवें।
चन्द्रगुप्त ।--(उठ कर चलता हुआ आप ही आप)
गुरु आयसु छल सों कलह, करिहू जीय डराय।
किमि नर गुरुनन सों लरहि, यहै सोच जिय हाय ॥
२० (सब जाते हैं--जवनिका गिरती है,
॥ तृतीय अङ्क समाप्त हुआ ॥