भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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चतुर्थ अङ्क । ६३

मलयकेतु ।—ठीक है, मित्र भागुरायण ! राक्षस मन्त्री का घर कहा है ? भागुरायण ।—इधर कुमार इधर [ दोनों घूमते हैं ] कुमार ! यही राक्षस मन्त्री का घर है—चलिए । मलयकेतु ।—चले ( दोनों राक्षस के निकट जाते हैं )। ५ राक्षस ।—अहा ! स्मरण आया ( प्रकाश ) कहो जी ! तुम ने कुसुमपुर में स्तनकलस वैतालिक को देखा था ? करभक ।- क्यों नही ? मलयकेतु ।—मित्र भागुरायण ! जब तक कुसुमपुर की बाते हों तब तक हम लोग इधर ही ठहर कर सुनें कि क्या १० बात होती है, क्योंकि—

भेद न कछु जामै खुले, याहीं भय सब ठौर ।
नृप सों मन्त्री जन कहहि, बात और की और ॥

भागुरायण ।—जो आज्ञा ( दोनों ठहर जाते हैं )। राक्षस ।—क्यो जी ! काम सिद्ध हुआ ? १५ करभक ।—अमात्य की कृपा से सब काम सिद्ध ही है । मलयकेतु ।—मित्र भागुरायण ! वह कौन सा काम है ? भागुरायण । कुमार ! मन्त्री के जी की बातें बडी गुप्त हैं। कौन जान ? इस से देखिये अभी सुन लेते हैं कि क्या कहते हैं । २० राक्षस ।—अजी, भली भांति कहो । करभक ।—सुनिये—जिस समय आप ने आज्ञा दिया कि करभक, तुम जाकर वैतालिक स्तनकलस से कह दो कि जब २ चाणक्य चन्द्रगुप्त की आज्ञा भङ्ग करे तब तब तुम ऐसे श्लोक पढो जिस से उस का जी और भी फिर जाय । २५ राक्षस ।—हा, तब ? करभक ।- तब मै ने पटने में जाकर स्तनकलस से आप का सन्देसा कह दिया ।