मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७६ मुहूर्त्तचिन्तामणि सर्वाङ्क योग तिथ्यक्षर्वारयुतिरद्रिगजाग्नितष्टा स्थानत्रयेत्र वियति प्रथमेऽतिदुःखी । मध्ये धनक्षतिरथो चरमे मृतिः स्या- त्स्थानत्रयेऽङ्कयुजि सौख्यजयौ निरुक्तौ ॥ २४ ॥ अन्वयः—तिथ्यक्षर्वारयुतिः स्थानत्रये अत्र (स्थाप्या) (क्रमेण) अद्रिगजाग्नितष्टा प्रथमे [स्थाने] वियति शून्ये सति अतिदुःखी स्यात्, मध्ये वियति (सति) धनक्षतिः स्यात्, अथो चरमे वियति मृतिः स्यात्, स्थानत्रये अंकयुजि (सति) सौख्यजयौ निरुक्तौ ॥ २४ ॥ जिस दिन यात्रा करना हो उस दिन शुक्लपक्ष की परीवा से लेकर जो तिथि हो, अश्विनी से लेकर जो नक्षत्र हो और रविवार से लेकर जो दिन हो, उन सबकी संख्याओं के योग को तीन स्थानों में रखे । प्रथम स्थान में सात का, दूसरे स्थान में आठ का, तीसरे स्थान में तीन का भाग दे । उन तीनों स्थानों में या प्रथम स्थान में शून्य शेष रहे तो यात्रा करने- वाला अतिदुःखी होता है, दूसरे स्थान में शून्य शेष रहे तो धन की हानि और तीसरे स्थान में शून्य बचे तो मृत्यु होती है । तीनों स्थानों में यदि अंक शेष हों तो यात्रा करनेवाला सुखी तथा विजयी होता है । उदाहरण—जैसे कार्त्तिक शुक्ल द्वितीया को मंगल दिन, अनुराधा नक्षत्र में यात्रा करना है । यहाँ तिथि की संख्या २, दिन की संख्या ३, नक्षत्र की संख्या १७ हुई । इन सबका योग २२ हुआ । इसको तीन स्थानों में रखे । प्रथम स्थान में सात का भाग देने से एक, दूसरे स्थान में आठ का भाग देने