मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनक्षत्रप्रकरण २७ अन्वयः—नासत्यान्तकवह्निधातृशशभृद्रुद्रादितिज्योरगाः, पितरः, भगः, अर्यमरवी, त्वष्टा, समीरः, शक्राग्नी, मित्रः, शक्रः निर्ऋतिः, तोयानि, विश्वे, विधिः, गोविन्दः, वसुतोयपाजचरणाहिर्बुध्न्यपूषाभिधाः (एते) क्रमात् ऋक्षेशाः (ज्ञेयाः) ॥ १ ॥ अश्विनी नक्षत्र के स्वामी अश्विनीकुमार, भरणी के यमराज, कृत्तिका के अग्नि, रोहिणी के ब्रह्मा, मृगशिरा के चन्द्रमा, आर्द्रा के रुद्र, पुनर्वसु के अदिति, पुष्य के बृहस्पति, आश्लेषा के सर्प, मघा के पितर, पूर्वाफाल्गुनी के भग देवता अर्थात् सूर्यविशेष, उत्तराफाल्गुनी के अर्यमा अर्थात् सूर्य- विशेष, हस्त के सूर्य, चित्रा के विश्वकर्मा, स्वाती के वायु, विशाखा के इन्द्र और अग्नि, अनुराधा के मित्र अर्थात् सूर्यविशेष, ज्येष्ठा के इन्द्र, मूल के के राक्षस, पूर्वाषाढ़ के जल, उत्तराषाढ़ के विश्वेदेव, अभिजित् के ब्रह्मा, श्रवण के विष्णु, धनिष्ठा के वसु, शतभिष के वरुण, पूर्वाभाद्रपद के अजचरण अर्थात् रुद्रविशेष, उत्तराभाद्रपद के अहिर्बुध्न्य अर्थात् रुद्रविशेष, रेवती के पूषा अर्थात् सूर्यविशेष स्वामी हैं ॥ १ ॥ नक्षत्र-स्वामियों का चक्र
| अ० | अ०कु० | पुन० | अदिति | हस्त | सूर्य | मूल | राक्षस | श० | वरुण |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ० | यम | पुष्य | बृहस्प० | चित्रा | त्वष्टा | पू० | जल | पू० | अजच० |
| कृ० | अग्नि | अश्ले० | सर्प | स्वा० | वायु | उ० | विश्वे० | उ० | अ० बु० |
| रो० | ब्रह्मा | मघा | पितर. | वि० | इन्द्र अ० | अ० | विधि | रे० | पूषा |
| मृ० | चन्द्रमा | पू० | भग | अनु० | मित्र | श्र० | विष्णु | × | × |
| आ० | रुद्र | उ० | अर्यमा | ज्ये० | इन्द्र | ध० | वसु | × | × |
नक्षत्रों की संज्ञा उत्तरात्रयरोहिण्यो भास्करश्च ध्रु