भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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नक्षत्रप्रकरण २७ अन्वयः—नासत्यान्तकवह्निधातृशशभृद्रुद्रादितिज्योरगाः, पितरः, भगः, अर्यमरवी, त्वष्टा, समीरः, शक्राग्नी, मित्रः, शक्रः निर्ऋतिः, तोयानि, विश्वे, विधिः, गोविन्दः, वसुतोयपाजचरणाहिर्बुध्न्यपूषाभिधाः (एते) क्रमात् ऋक्षेशाः (ज्ञेयाः) ॥ १ ॥ अश्विनी नक्षत्र के स्वामी अश्विनीकुमार, भरणी के यमराज, कृत्तिका के अग्नि, रोहिणी के ब्रह्मा, मृगशिरा के चन्द्रमा, आर्द्रा के रुद्र, पुनर्वसु के अदिति, पुष्य के बृहस्पति, आश्लेषा के सर्प, मघा के पितर, पूर्वाफाल्गुनी के भग देवता अर्थात् सूर्यविशेष, उत्तराफाल्गुनी के अर्यमा अर्थात् सूर्य- विशेष, हस्त के सूर्य, चित्रा के विश्वकर्मा, स्वाती के वायु, विशाखा के इन्द्र और अग्नि, अनुराधा के मित्र अर्थात् सूर्यविशेष, ज्येष्ठा के इन्द्र, मूल के के राक्षस, पूर्वाषाढ़ के जल, उत्तराषाढ़ के विश्वेदेव, अभिजित् के ब्रह्मा, श्रवण के विष्णु, धनिष्ठा के वसु, शतभिष के वरुण, पूर्वाभाद्रपद के अजचरण अर्थात् रुद्रविशेष, उत्तराभाद्रपद के अहिर्बुध्न्य अर्थात् रुद्रविशेष, रेवती के पूषा अर्थात् सूर्यविशेष स्वामी हैं ॥ १ ॥ नक्षत्र-स्वामियों का चक्र

अ०अ०कु०पुन०अदितिहस्तसूर्यमूलराक्षसश०वरुण
भ०यमपुष्यबृहस्प०चित्रात्वष्टापू०जलपू०अजच०
कृ०अग्निअश्ले०सर्पस्वा०वायुउ०विश्वे०उ०अ० बु०
रो०ब्रह्मामघापितर.वि०इन्द्र अ०अ०विधिरे०पूषा
मृ०चन्द्रमापू०भगअनु०मित्रश्र०विष्णु××
आ०रुद्रउ०अर्यमाज्ये०इन्द्रध०वसु××

नक्षत्रों की संज्ञा उत्तरात्रयरोहिण्यो भास्करश्च ध्रु