मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनक्षत्रप्रकरण ३९ नवें और पाँचवें स्थान में शुभग्रहों के रहते और आठवें स्थान में किसी ग्रह के न रहते द्रव्य का प्रयोग अर्थात् ऋण आदि देना वा रोजगार में लगाना शुभ होता है । मङ्गल के दिन, संक्रान्ति के दिन, जिस दिन वृद्धि योग हो उस दिन, हस्त नक्षत्र में और रविवार को ऋण नहीं लेना चाहिए; क्योंकि इन दिनों में लिया हुआ ऋण लेनेवाले के वंशभर में होता है; पुत्र-पौत्रादिकों में से किसी का दिया नहीं चुकता । बुधवार को कोई किसी को भी अपना धन किसी तरह से भी न दे ॥ २७ ॥ हल चलाने का मुहूर्त्त मूलद्वीशमघाचरध्रुवमृदुक्षिप्रैर्विनाकं शनिं पापैर्हीनबलैर्विधौ जलगृहे शुक्रे विधौ मांसले । लग्ने देवगुरौ हलप्रवहणं शस्तं न सिंहे घटे कर्काजैणघटे तनौ क्षयकरं रिक्तासु षष्ठ्यां तथा ॥ २८ ॥ अन्वयः—मूलद्वीशमघाचरध्रुवमृदुक्षिप्रैः, अर्कं, शनि विना, पापैः हीनबलैः, विधौ जललवे, शुक्रे विधौ मांसले, देवगुरौ लग्ने हलप्रवहणं शस्तम् । सिंहे घटे, कर्काजैणघटे तनौ तथा रिक्तासु षष्ट्यां क्षयकरम् ॥ २८ ॥ मूल, विशाखा, मघा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, पुनर्वसु, स्वाती, तीनों उत्तरा, रोहिणी, चित्रा, अनुराधा, मृगशिरा, रेवती, अश्विनी, पुष्य और हस्त इन नक्षत्रों में; शनिवार और रविवार छोड़ अन्य दिनों में; पापग्रहों के निर्बल रहते; और जलराशि में चन्द्रमा के रहते; शुक्र के उदय रहते; लग्न में पूर्ण चन्द्रमा वा बृहस्पति के रहते पहिले पहिल हल चलाना शुभदायक होता है । यदि सिंह, कुम्भ, कर्क, मेष, मकर और तुला लग्न; चौथि, नवमी, चतुर्दशी, छठि और अष्टमी तिथि हो तो क्षयकारक होता है ॥ २८ ॥ बीजोप्तिमुहूर्त्त एतेषु श्रुतिवारुणादितिविशाखोडूनि भौमं विना बीजोप्तिर्गदिता शुभा त्वशुभतोऽष्टाग्नीन्दुरामेन्दवः । रामेन्द्रग्नियुगान्यसच्छुभकराण्युप्तौ हलेऽर्कोज्झिता- रुद्रामाष्टनवाष्टभानि मुनिभिः प्रोक्तान्यसत्सन्ति च ॥ २९ ॥ अन्वयः—श्रुतिवारुणादितिविशाखोडूनि विना एतेषु [पूर्वोक्तनक्षत्रेषु], भौमं विना, बीजोप्तिः शुभा गदिता । तु [पुनः] अशुभतः अष्टाग्नीन्दुरामेन्दवः रामेन्द्रग्नियुगानि