मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल 7 भवलुंठननकोविद=संसार मनेडि पाशमुनु तेग गोट्टुट यन्दु नेर्पुगलवाडा, इति=अनि, नाथ=प्रभुडा, इति=अनि, नागशयन=आदि शेषुडे पान्पुगा गलवाडा, इति=अनि, जगत्+निवास=प्रपञ्चमुनकु आधारमैनवाडा, इति=अनि, आलापनं= स्मरणचेयुटनु, मे=नाकु, प्रतिपदं=एल्लप्पुडु्नु, कुरु=दयचेयुमु. ओ मुकुन्दा! श्रीवल्लभायनि, वरदायनि, दयापरायनि, भक्तप्रियायनि, संसारमुनु बोगोट्टुटयन्दु समर्थुडायनि, नाथुडायनि, शेषशयनायनि, लोकम्बुलकेल्ल निवासभूतुडायनि माटिमाटिकी नाकु आलापनं बॊसगुमु. ओ ऐहिकामुष्मिक प्रदुडवगु मुकुन्दा! श्रीवल्लभा यनु नट्लु चेयुमु. श्रीवल्लभु डनुटलो विशेष मेमनगा भगवन्तुडु परम वात्सल्य स्वभावु डगुटचेत पापकृत्यु डगु आत्मनु दण्डिञ्चुटकु सिद्धपडुनु. लक्ष्मीदेविकि अनुग्रहिञ्चुट मात्रमे तेलियुनु गानि निग्रहिञ्चुट तेलियदु. ईमे पुरुषकार भूतुरालुग नुन्नदि. द्वय मन्त्र प्रकरणमु 13व वाक्यमुनु बट्टि ई पिराट्टिकि चेतनुलतो मातृत्व सम्बन्ध मुण्डुटचेत वीरि दुःखमुनु सहिम्पजालक वीरिकि चेयवलसिन कार्यमुलनु तानु अवलम्बिञ्चि ईश्वरुनितो पत्नीत्वसं बन्धमु गलिगि आयनकु अत्यन्त प्रियुरालै युण्डुटचेत आयननु वशपऱचुकोनि युण्डुनु. इट्लगुटचेत ईमे चेयु पुरुषकारमुनकु ए विधमैन प्रतिबन्धमुमु उण्डदु. इदिगाक श्रियनुमाटकु-- भक्तुल आर्त्तध्वनि विनुनु, भगवन्तुनिकि विनिपिञ्चुनु, भक्तुलचेत नाश्रा यिम्पबडुनु, भगवन्तु नाश्रयिञ्चुनु, भक्तुलयॊक्कु कामक्रोधादि दोषमुलनु परिहारिम्पजेसि ज्ञानभक्त्यादि सद्गुणमुलनु गलिगिञ्चि मोक्ष योग्युलुग जेयुनु अनि यर्थमु. श्रीवल्लभा यनगा पैन जेप्पिन प्रभाव सम्पन्नुरालगु लक्ष्मीदेविकि वल्लभुडा यनि यर्थमु. लेक लक्ष्मीदेविनि वल्लभगा गलवाडा यनियु नर्थमु.