भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 167 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 87

80 मुकुन्दमाल ततः पदं तत्परिमार्गितव्यं यस्मिन्गता न निवर्तन्ति भूयः, तमेव चाद्यं पुरुषं प्रपद्ये यतः प्रवृत्तिः प्रसृता पुराणी. -- गीत. 15.3-4 भगवंतुडे दयचेयकुन्न जन्मसहस्रमुल कयिननु भक्तिकलु गुना? क्रिंदि श्लोकमुन नी भक्तियोक्कटे दाटिंचुनंटिवि, अदि नीकुनु नाकुनु कानि पनि. कान मनसा! वानिनि प्रार्थिंचि ओडनु संपादिंचुटकु यत्निंचेदनु. कुलशेखरुलु मनसुनकु ई रीतिग बोधिंचि भगवंतुनि प्रार्थिंचुचुन्नारु.

  • कुलशेखरुलु: स्वामी! नी पादारविंदमुलयंदलि भक्तिनि प्रसादिं पुमु. स्वामी : ना दर्शनमु कागाने पादभक्ति नडुगवच्चुना? कुल : स्वामी! नीवु वरदुडवु कदा! एव रेवरि केदेदि कावलयुनो दानि निच्चुवाडवु गदा! अंदुचेतने अट्लडिगितिनि. भक्ति निम्मु. स्वामी : ना पादभक्ति येल? कुल : समुद्रमुन मुनिगियुंडुटचेत. स्वामी : ए समुद्रमुन मुनिगितिवि? कुल : संसारसमुद्रमुन. स्वामी : आ समुद्र मेट्लुन्नदि? कुल : आशये आ समुद्रमुनकु जलमु. (आश जलमुग वर्णिंपबडुटचेत दानिवलन हानि कल्गुननि अर्थमगुचु न्नदि. भगवंतुनि दर्शिंप वलयु ननियुनु, वानि कथलु विनवलयुननियुनु आशयुंडरादा? अदि युनु तप्पे अगुना? अनगा अट्लु कादु.