नाड़ी परीक्षा एवं नाड़ी विज्ञान (महर्षि कणाद एवं रावण - वैद्यप्रभा हिन्दी व्याख्या सहित)
Nadi Pariksha and Nadi Vijnana with Hindi Commentary
महर्षि कणाद एवं रावण द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिंदीटीकासहिता १३ देहे धमन्यो धन्यास्ताः पंचेन्द्रियगुणावहाः । नाभिकंदस्थितास्तास्तुनाभीचक्रेप्रवेष्टिताः ॥५५॥ शरीरमें सब धमनी नाड़ी धन्य हैं, पांचों इन्द्रियोंके गुणको वहती हैं, नाभिमूलमें स्थित हैं और नाभिचक्रमें प्रवेष्टित हो रही हैं ॥५५॥ इडा च पिङ्गला चैव सुषम्ना च सरस्वती । वारुणी चैवपूषा च हस्तिजिह्वा यशस्विनी ॥५६॥ इडा, पिंगला, सुषुम्ना, सरस्वती, वारुणी, पूषा, हस्तिजिह्वा यशस्विनी ॥५६॥ विश्वोदरी कुहुश्चैव शंखिनी च पयस्विनी । अलंबुषा च गांधारी मुख्याश्चैताश्चतुर्दश ॥५७॥ विश्वोदरी, कुहु, शंखिनी, पयस्विनी, अलंबुषा, गांधारी ये चौदह नाड़ी प्रधान हैं ॥५७॥ इडा च पिंगला चैव सुषम्ना च सरस्वती । गांधारी हस्तिजिह्वा च कुहुःपूषायशस्विनी ॥५८॥ इडा, पिंगला, सुषुम्ना, सरस्वती, गांधारी, हस्तिजिह्वा, कुहु, पूषा, यशस्विनी ॥५८॥ चारनालम्बुषा विश्वा शंखिनी च पयस्विनी । एताः प्राणवहानाड्योजीवकोशे प्रतिष्ठिताः ॥५९॥ चारना, अलंबुषा, विश्वा, शंखिनी, पयस्विनी ये नाड़ी प्राणोंको वहनेवाली जीवकोशमें स्थित हैं ॥५९॥ तत्र प्रधाना नाड्यस्तु दश वायुप्रवाहिकाः । इडा च पिंगला चैव सुषम्ना चोर्ध्वगामिनी ॥६०॥ उनमें प्रधान दश नाड़ी वायुको वहती हैं, इडा पिंगला सुषुम्ना ये नाड़ी ऊपरको गमन करती हैं ॥६०॥ गांधारी हस्तिजिह्वा च प्रसारगमना स्थिता । अलम्बुषा यशा चैव दक्षिणाङ्गे समन्विता ॥६१॥