भारतकोश
नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

नागानन्दम् (सम्राट हर्षवर्धन - संस्कृत मूल एवं हिन्दी व्याख्या)

Nagananda Nataka of Emperor Harsha with Commentary

सम्राट हर्षवर्धन द्वारा

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पृष्ठ 243

( २१६ ) भक्ति के साथ दूर तक अपने मुख तथा सिर को झुकाने वाले, सदा मेरे पैरों पर प्रणाम करने वाले तेरा यह चूडामणि, रगड़ से चिकना हुआ भी क्यों मेरे हृदय को इतने ज़ोर से काट रहा है। द्धा - हा पुत्र जीमूतवाहन, तुम्हें तो गुरुजनों की सेवा को छोड़ दूसरा कोई सुख अच्छा ही नहीं लगता था, फिर तुम अब माता पिता को छोड़ कर स्वर्ग का सुख अनुभव करने कैसे चले गए हो ? जीमूतकेतु — (आंसुओं के साथ) देवी ! क्या हम जीमूतवाहन के बिना जीएँगे जो तुम इस प्रकार विलाप कर रही हो ? मलयवती — (चरणों पर गिर कर, हाथ जोड़ कर) — आर्य्यपुत्र की निशानी यह चूडामणि मुझे दे दीजिए, ताकि इसे छाती से लगाकर अग्नि में प्रवेश कर के अपने हृदय की जलन तथा दुःख दूर करूँ ।

१. विरोधाभास ।