संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 462, कुल 770 में से
संदर्भ में पढ़ें४६० * संक्षिप्त नारदपुराण *
'ॐ नमो भगवते रामाय महापुरुषाय नमः' यह अठारह अक्षरोंका मन्त्र है। इसके विश्वामित्र ऋषि, धृति छन्द, श्रीराम देवता, ॐ बीज और 'नमः' शक्ति है। मन्त्रके एक, दो, चार, तीन, छः और दो अक्षरोंवाले पदोंद्वारा एकाग्रचित्त हो षडङ्ग-न्यास करे। साथ पुष्पक-विमानमें सिंहासनपर बैठे हैं। उनका मस्तक जटाओंके मुकुटसे सुशोभित है। उनका वर्ण श्याम है और उन्होंने धनुष-बाण धारण कर रखा है। उनकी विजयके उपलक्षमें निशान, भेरी, पटह, शङ्ख और तुरही आदिकी ध्वनियोंके साथ-साथ नृत्य आरम्भ हो गया है। चारों ओर जय-
ध्यान
निःशाणभेरीपटहशङ्खतूर्यादिनिःस्वनैः ॥
प्रवृत्तनृत्ये परितो जयमङ्गलभाषिते ।
चन्दनागुरुकस्तूरीकर्पूरादिसुवासिते ॥
सिंहासने समासीनं पुष्पकोपरि राघवम्।
सौमित्रिसीतासहितं जटामुकुटशोभितम्॥
चापबाणधरं श्यामं ससुग्रीवविभीषणम्।
हत्वा रावणमायान्तं कृतत्रैलोक्यरक्षणम् ॥
भगवान् राघवेन्द्र रावणको मारकर त्रिलोकीकी रक्षा करके लौट रहे हैं। वे सीता और लक्ष्मणके जयकार तथा मङ्गल-पाठ हो रहा है। चन्दन, अगरु, कस्तूरी और कपूर आदिकी मधुर गन्ध छा रही है।
इस प्रकार ध्यान करके मन्त्रोपासक मन्त्रकी अक्षर-संख्याके अनुसार अठारह लाख जप करे और घृतमिश्रित खीरकी दशांश आहुति करके पूर्ववत् पूजन करे।
ॐ रां श्रीं रामभद्र महेष्वास रघुवीर नृपोत्तम।
दशास्यान्तक मां रक्ष देहि मे परमां श्रियम् ॥*
यह पैंतीस अक्षरोंका मन्त्र है। बीजाक्षरोंसे हुम्। 'जय जय राम' नेत्राभ्यां वौषट्। 'जय जय राम' अस्त्राय फट्। पुराणमें इसका प्रमापक मूल श्लोक इस प्रकार है—
षडङ्गानि प्रकुर्वीत द्विरावृत्या पदत्रयैः।
* श्रीरामतापनीयोपनिषद्में यही मन्त्र इस प्रकार है—
रामभद्र महेष्वास रघुवीर नृपोत्तम। भो दशास्यान्तकास्माकं रक्षां देहि श्रियं च ते ॥