भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पृष्ठ 547, कुल 770 में से

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पृष्ठ 547
  • पूर्वभाग- चतुर्थ पाद * ५४५

पार्वती तथा ऋषियोंका संवाद, पार्वतीविवाह-मङ्गल, कुमार कार्तिकेयका जन्म, कुमारकी विजय, तारकासुरका भयंकर वध, नृसिंहभगवान्‌की कथा, ब्रह्माजीकी सृष्टि, अन्धकासुरका वध, वाराणसी-माहात्म्य, नर्मदा-माहात्म्य, प्रवर-गणना, पितृगाथाका कीर्तन, उभयमुखी गौका दान, काले मृगचर्मका दान, सावित्रीकी कथा, राजधर्मका वर्णन, नाना प्रकारके उत्पातोंका कथन, ग्रहशान्त, यात्रानिमित्तक वर्णन, स्वप्नमङ्गलकीर्तन, ब्राह्मण और वराहका माहात्म्य, समुद्र-मन्थन, कालकूटकी शान्ति, देवासुर-संग्राम, वास्तुविद्या, प्रतिमालक्षण, देवमन्दिर-निर्माण, प्रासादलक्षण, मण्डपलक्षण, भविष्य राजाओंका वर्णन, महादानवर्णन तथा कल्पकीर्तन—इन सब विषयोंका इस पुराणमें वर्णन किया गया है। जो पवित्र, कल्याणकारी तथा आयु और कीर्ति बढ़ानेवाले इस पुराणका पाठ अथवा श्रवण करता है, वह भगवान् विष्णुके धाममें जाता है। जो इस पुराणको लिखकर सुवर्णमय मत्स्य और गौके साथ विषुव योगमें ब्राह्मणको सत्कारपूर्वक दान देता है, वह परम पदको प्राप्त होता है।

गरुडपुराणकी विषय-सूची और पुराणके पाठ, श्रवण और दानकी महिमा

ब्रह्माजी कहते हैं—मरीचे! सुनो, अब मैं मङ्गलमय गरुडपुराणका वर्णन करता हूँ। गरुडके पूछनेपर गरुडासन भगवान् विष्णुने उन्हें तार्क्ष्य-कल्पकी कथासे युक्त उन्नीस हजार श्लोकोंका गरुडपुराण सुनाया था। इसमें पहले पुराणको आरम्भ करनेके लिये प्रश्न किया गया है। फिर संक्षेपसे सृष्टिका वर्णन है। तत्पश्चात् सूर्य आदिके पूजनकी विधि, दीक्षाविधि, श्राद्ध-पूजा, नवव्यूहपूजाकी विधि, वैष्णव-पञ्जर, योगाध्याय, विष्णुसहस्रनामकीर्तन, विष्णुध्यान, सूर्यपूजा, मृत्युञ्जय-पूजा, मालामन्त्र, शिवार्चा, गोपालपूजा, त्रैलोक्यमोहन श्रीधरपूजा, विष्णु-अर्चा, पञ्चतत्त्वार्चा, चक्रार्चा, देवपूजा, न्यास आदि, संध्योपासन, दुर्गार्चन, सुरार्चन, महेश्वर-पूजा, पवित्रारोपण-पूजन, मूर्तिध्यान, वास्तुमान, प्रासादलक्षण, सर्वदेवप्रतिष्ठा, पृथक् पूजाविधि, अष्टाङ्गयोग, दानधर्म, प्रायश्चित्तविधि, द्वीपेश्वरों और नरकोंका वर्णन, सूर्यव्यूह, ज्योतिष, सामुद्रिकशास्त्र, स्वरज्ञान, नूतनरत्नपरीक्षा, तीर्थ-माहात्म्य, गयाका उत्तम माहात्म्य, पृथक्-पृथक् विभागपूर्वक मन्वन्तर-वर्णन, पितरोंका उपाख्यान, वर्णधर्म, द्रव्यशुद्धि, समर्पण, श्राद्धकर्म, विनायकपूजा, ग्रहयज्ञ, आश्रम, जननाशौच, प्रेतशुद्धि, नीति-शास्त्र, व्रत-कथा, सूर्यवंश, सोमवंश, श्रीहरिकी अवतारकथा, रामायण, हरिवंश, भारताख्यान, आयुर्वेदनिदान, चिकित्सा, द्रव्यगुणनिरूपण, रोगनाशक विष्णुकवच, गरुडकवच, त्रैपुर मन्त्र, प्रश्नचूडामणि, अश्वायुर्वेदकीर्तन, ओषधियोंके नामका कीर्तन, व्याकरणका ऊहापोह, छन्दःशास्त्र, सदाचार, स्नानविधि, तर्पण, बलिवैश्वदेव, संध्या, पार्वणकर्म, नित्यश्राद्ध, सपिण्डन, धर्मसार, पापोंका प्रायश्चित्त, प्रतिसंक्रम, युगधर्म, कर्मफल, योगशास्त्र, विष्णुभक्ति, श्रीहरिको नमस्कार करनेका