भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

पृष्ठ 669, कुल 770 में से

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पृष्ठ 669
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गव्य (दही-घी आदि) भी दे। तत्पश्चात् पहलेसे तैयार करायी हुई मछली, कछुआ, मेढ़क, मगर आदि जलचर जीवोंकी यथाशक्ति सुवर्णमयी अथवा रजतमयी प्रतिमा स्थापित करके उनकी पूजा करे, वैसी प्रतिमा न मिलनेपर आटेकी प्रतिमा बनावे और मन्त्रज्ञ पुरुष पुष्प आदिसे पूर्वनिर्दिष्ट मन्त्रद्वारा ही उनकी पूजा करके उन्हें गङ्गाजीमें छोड़ दे। यदि अपने पास वैभव हो तो उस दिन गङ्गाजीकी रथयात्रा भी करावे। रथपर गङ्गाजीकी प्रतिमा या चित्र हो, उसका मुख उत्तर दिशाकी ओर रहे। रथपर भ्रमण करती हुई गङ्गाजीका दर्शन इस लोकमें पापी मनुष्योंके लिये अत्यन्त दुर्लभ है। इस प्रकार विधिपूर्वक रथयात्रा सम्पन्न करके मनुष्य आगे बताये जानेवाले दस प्रकारके पापोंसे तत्काल ही मुक्त हो जाता है। बिना दिये हुए किसीकी वस्तु ले लेना, हिंसा करना और परायी स्त्रीके साथ सम्बन्ध रखना—ये तीन प्रकारके शारीरिक पाप माने गये हैं। कठोरतापूर्ण वचन, असत्य, चुगली तथा अनाप-शनाप बातें बकना—ये चार प्रकारके वाचिक पाप कहे गये हैं। दूसरेका धन हड़पनेकी बात सोचना, मनसे किसीका अनिष्ट-चिन्तन करना और झूठा अभिनिवेश (मरण-भय)—ये तीन प्रकारके मानसिक पाप हैं। ये दस प्रकारके पाप करोड़ों जन्मोंद्वारा संचित हो तो भी पूर्वोक्त विधिसे रथयात्रा करनेवाला पुरुष उनसे मुक्त हो जाता है।

पूजाका मन्त्र इस प्रकार हैं—'ॐ नमो दशहरायै नारायण्यै गङ्गायै नमः।' जो मनुष्य उस दिन रातमें और दिनमें भी उक्त मन्त्रका पाँच-पाँच हजार जप करता है, वह मनुके बताये हुए दस धर्मों* का फल प्राप्त करता है। आगे बताये जानेवाले स्तोत्रको विधिपूर्वक ग्रहण करके उस दिन गङ्गाजीके आगे उसका पाठ करे। फिर भगवान् विष्णुकी पूजा करे। वह स्तोत्र इस प्रकार है—

ॐ शिवस्वरूपा गङ्गाको नमस्कार है। कल्याण प्रदान करनेवाली गङ्गाको नमस्कार है। विष्णुरूपिणी देवीको नमस्कार है। आप भगवती गङ्गाको बारंबार नमस्कार है। सम्पूर्ण देवता आपके स्वरूप हैं, आपको नमस्कार है। आपका स्वरूपभूत जल उत्तम औषध है, आपको नमस्कार है। आप समस्त जीवोंके सम्पूर्ण रोगोंका निवारण करनेके लिये श्रेष्ठ वैद्यके समान हैं, आपको नमस्कार है। आप स्थावर और जङ्गम जीवोंसे उत्पन्न होनेवाले विषका नाश करनेवाली हैं, आपको नमस्कार है। संसाररूपी विषका नाश करनेवाली जीवनदायिनी गङ्गादेवीको बारंबार नमस्कार है। आप आध्यात्मिक आदि तीनों तापोंका निवारण करनेवाली एवं सबके प्राणोंकी अधीश्वरी हैं, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। आप शान्तिस्वरूपा तथा सबका संताप दूर करनेवाली हैं, सब कुछ आपका ही स्वरूप है, आपको नमस्कार है। सबको पूर्णतः शुद्ध करनेवाली और सब पापोंसे छुटकारा दिलानेवाली आपको नमस्कार है। आप भोग और मोक्ष देनेवाली भोगवती (नामक पातालगङ्गा) हैं, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। आप ही मन्दाकिनी नामसे प्रसिद्ध आकाशगङ्गा हैं, आपको नमस्कार है। आप स्वर्ग देनेवाली हैं, आपको नमस्कार है, नमस्कार है। तीनों लोकोंमें मूर्तरूपसे प्रकट होनेवाली आप गङ्गादेवीको बारंबार नमस्कार है। शुक्लरूपसे स्थित होनेवाली आपको नमस्कार है। सबका क्षेम चाहनेवाली क्षेमवतीको


* श्रीमनुके बतलाये हुए दस धर्म ये हैं—

धृतिः क्षमा दमोऽस्तेयं शौचमिन्द्रियनिग्रहः। धीर्विद्या सत्यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्॥ (६। ९२)

'धैर्य, क्षमा, मनका निग्रह, चोरी न करना, बाहर-भीतरकी पवित्रता, इन्द्रियनिग्रह, सात्त्विक बुद्धि, अध्यात्मविद्या, सत्य और अक्रोध—ये दस धर्मके लक्षण हैं।'