भारतकोश
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished770 पृष्ठ

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पृष्ठ 721
  • उत्तरभाग * ७१९

सूर्योपस्थानके पश्चात् पुण्यमयी वेदमाता गायत्रीका एक सौ आठ बार जप करे। साथ ही सूर्यदेवतासम्बन्धी अन्य मन्त्रोंका जप करके तीन बार परिक्रमाके पश्चात् सूर्यदेवको प्रणाम करे। ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य—इन तीन वर्णोंके लिये वेदोक्त विधिसे स्नान और जपका विधान है। वरारोहे ! स्त्री और शूद्रोंके स्नान और जप वैदिक विधिसे रहित होते हैं।

इसके बाद भक्तिभावसे मन्दिरमें स्थित श्रीपुरुषोत्तमके समीप जाय। वहाँ हाथ-पैर धोकर विधिपूर्वक आचमन करके भगवान्‌को पहले घीसे स्नान करावे, उसके बाद दूधसे। तत्पश्चात् मधुगन्धोदक एवं तीर्थचन्दनके जलसे उन्हें स्नान कराकर दो श्रेष्ठ वस्त्र भक्तिपूर्वक भगवान्‌को पहनावे। चन्दन, अगुरु, कर्पूर तथा कुंकुमका लेप लगावे। फिर कमलके फूलोंसे पराभक्तिपूर्वक भगवान् पुरुषोत्तमकी पूजा करे। इस प्रकार भोग और मोक्ष देनेवाले मनुष्य एक बार पुरुषोत्तमपुरीकी यात्रा करता है वह विष्णुलोकमें जाता है। ब्रह्मपुत्री ! जब वहाँकी बारह यात्राएँ पूर्ण हो जायें उस समय विधिपूर्वक उसकी प्रतिष्ठा (उद्यापन) करनी चाहिये, जो सब पापोंका नाश करनेवाली है। ज्येष्ठ मासके शुक्लपक्षमें एकादशी तिथिको एकाग्रचित्तसे किसी पवित्र जलाशयपर जाकर आचमन करे और इन्द्रियसंयमपूर्वक पवित्र भावसे सब तीर्थोंका आवाहन करके भगवान् नारायणका ध्यान करते हुए शास्त्रीय पद्धतिसे स्नान करे। स्नानके पश्चात् विधिपूर्वक देवताओं, ऋषियों, अपने पितरों तथा अन्य लोगोंका उनके नाम और गोत्रका उच्चारण करते हुए तर्पण करे। फिर जलसे निकलकर दो स्वच्छ वस्त्र पहने और विधिसे आचमन करके जगन्नाथ श्रीहरिकी पूजा करके उनके समक्ष अगुरु, पवित्र गुग्गुल तथा अन्य सुगन्धित पदार्थों एवं घृतके साथ धूप जलाये। फिर अपनी शक्तिके अनुसार घीसे भक्तिपूर्वक दीपक जलाकर रखे। मोहिनी ! एकाग्रचित्त होकर गायके घी अथवा तिलके तेलसे बारह दीपक और जलाकर रखे। तदनन्तर नैवेद्यके रूपमें खीर, पूआ, पूड़ी, बड़ा, लड्डू, खाँड और फल निवेदन करे। इस प्रकार पञ्चोपचारसे श्रीपुरुषोत्तमकी पूजा करके 'ॐ नमः पुरुषोत्तमाय'—इस मन्त्रका एक सौ आठ बार जप करे। तत्पश्चात् दण्डकी भाँति पृथ्वीपर पड़कर भगवान्‌को प्रार्थना द्वारा प्रसन्न करे। फिर एकाग्रचित्त हो भगवान्‌के ऊपर भाँति-भाँतिके पुष्पोंसे एक सुन्दर एवं विचित्र शोभायुक्त