संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
DevanagariHindipublished770 पृष्ठ
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| प्राप्त कर लेता है। कौशिकी-सङ्गमतीर्थमें जाकर दृषद्वती नदीमें स्नान करनेवाला पुरुष यदि नियमित आहार करके नियमपूर्वक रहे तो सब पापोंसे मुक्त हो जाता है। वहाँसे व्यासस्थलीको जाय, वहाँ जानेसे मनुष्य शोकका भागी नहीं होता। किन्दुशू कूपमें जाकर वहाँ सेरभर तिल दान करके मानव परम सिद्धि प्राप्त करता है और मरनेपर मुक्त हो जाता है। आह्र और मुदित—ये दो तीर्थ भूतलपर विख्यात हैं। इनमें स्नान करके शुद्धचित्त हुआ मानव सूर्यलोकको प्राप्त कर लेता है। तदनन्तर मृगमुच्यतीर्थमें जाकर जो गङ्गाको प्रणाम करके स्थित होता है, वह महादेवजीका पूजन करके अश्वमेध-यज्ञका फल पाता है।<br><br>इसके बाद तीनों लोकोंमें विख्यात वामनतीर्थमें जाय, जहाँ बलिके यज्ञमें उनके राज्यको हर लेनेकी इच्छासे भगवान् वामनका प्रादुर्भाव हुआ था। वहाँ विष्णुपदमें स्नान और वामनजीका पूजन करके सब पापोंसे शुद्धचित्त हुआ मनुष्य भगवान् विष्णुके लोकमें प्रतिष्ठित होता है। वहीं सब पातकोंका नाश करनेवाला ज्येष्ठाश्रमतीर्थ है। ज्येष्ठ शुक्ला एकादशीको उपवास करके दूसरे दिन द्वादशीको वहाँ विधिपूर्वक स्नान करनेवाला पुरुष मनुष्योंमें श्रेष्ठता प्राप्त कर लेता है। देवि! उस तीर्थमें किया हुआ श्राद्ध पितरोंको अत्यन्त संतोष देनेवाला होता है। वहीं सूर्यतीर्थ है, उसमें स्नान करके मानव सूर्यलोकका भागी होता है। कुलोत्तारणतीर्थमें जाकर स्नान करनेवाला पुरुष अपने कुलका उद्धार करके कल्पपर्यन्त स्वर्गलोकमें निवास करता है। पवनकुण्डमें स्नान करके भगवान् महेश्वरका दर्शन करनेसे मनुष्य सब पापोंसे मुक्त हो भगवान् शिवके धाममें जाता है। हनुमत्तीर्थमें स्नान करके मानव मोक्ष प्राप्त कर लेता है। राजर्षि शालहोत्रके तीर्थमें स्नान करनेसे सब पाप दूर हो जाते हैं। सरस्वतीके श्रीकुम्भ नामक तीर्थमें स्नान | करके यज्ञका भागी होता है। नैमिषकुण्डमें स्नान करनेसे नैमिषारण्यमें स्नानका पुण्य प्राप्त होता है। वेदवतीतीर्थमें स्नान करके नारी सतीधर्मके पालनका पुण्य प्राप्त कर लेती है। ब्रह्मतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्य ब्राह्मणत्व प्राप्त करता है और ब्रह्माजीके उस परम धाममें जाता है, जहाँ जाकर कोई शोक नहीं करता। सोमतीर्थमें स्नान करके मनुष्य स्वर्गीय गति प्राप्त कर लेता है। सप्तसारस्वततीर्थमें जाकर स्नान करनेवाला मनुष्य मोक्षका भागी होता है। सप्तसारस्वततीर्थ वह स्थान है, जहाँ सातों सरस्वतीकी धाराओंका भलीभाँति सङ्गम हुआ है। उन सबके नाम इस प्रकार हैं—सुप्रभा, काञ्चनाक्षी, विशालाक्षी, मनोहरी, सुनन्दा, सुवेणु तथा सातवीं विमलोदका। उसी प्रकार औशनसतीर्थमें स्नान करके मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता है। कपालमोचनमें स्नान करके ब्रह्महत्यारा भी शुद्ध हो जाता है। विश्वामित्र-तीर्थमें स्नान करनेवाला मानव ब्राह्मणत्व प्राप्त कर लेता है। तदनन्तर पृथूदकतीर्थमें स्नान करके तीर्थसेवी पुरुष भवबन्धनसे मुक्त हो जाता है और अवकीर्णमें स्नान करनेसे उसे ब्रह्मचर्यका फल मिलता है। जो मधुस्रावमें जाकर स्नान करता है, वह पातकोंसे मुक्त हो जाता है। वसिष्ठतीर्थमें स्नान करनेसे वसिष्ठ-लोककी प्राप्ति होती है। अरुणा-सङ्गममें स्नान करके तीन रात उपवास करनेवाला मनुष्य पुनः स्नान करके मोक्षका भागी होता है।<br><br>मोहिनि! वहाँ दूसरा सोमतीर्थ है। उसमें स्नान करके चैत्र शुक्ला षष्ठीको श्राद्ध करनेवाला पुरुष अपने पितरोंका उद्धार कर देता है। पञ्चवटमें स्नान करके योगमूर्तिधारी भगवान् शिवकी विधिपूर्वक पूजा करनेसे मानव देवताओंके साथ आनन्दका भागी होता है। कुरुतीर्थमें स्नान करनेवाला मनुष्य सम्पूर्ण सिद्धियोंको पा लेता है। स्वर्गद्वारमें गोता लगानेवाला मानव स्वर्गलोकमें पूजित होता है। |