संक्षिप्त नारद पुराण
Sankshipt Narada Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 758, कुल 770 में से
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करनेपर वह अनन्तगुना हो जाता है। सुभगे! यहाँसे पापविनाशनतीर्थमें जाकर स्नान करनेसे मनुष्यके सारे पाप धुल जाते हैं और वह स्वर्गलोकमें प्रतिष्ठित होता है। इसके बाद सीताकुण्डमें जाकर वहाँ भलीभाँति स्नान करके जो देवताओं और पितरोंका तर्पण करता है, वह समस्त कामनाओंको प्राप्त कर लेता है। फिर मङ्गलतीर्थमें जाकर वहाँ स्नान करनेसे मनुष्य पापमुक्त होता है। अमृतवापीतीर्थमें स्नान करके मरणधर्मा मानव अमरत्व प्राप्त कर लेता है। ब्रह्मकुण्डमें स्नान करनेसे मनुष्यको ब्रह्मलोककी प्राप्ति होती है। लक्ष्मणतीर्थमें स्नान करनेसे मनुष्य योगगति पाता है। हनुमत्-कुण्डमें स्नान करके मनुष्य शत्रुओंके लिये दुर्जय हो जाता है। रामकुण्डमें स्नान करनेवाला मानव श्रीरामका सालोक्य प्राप्त करता है। अग्नितीर्थमें स्नान करके मनुष्य सब पापोंसे छूट जाता है। शिवतीर्थमें स्नान करनेसे शिवलोककी प्राप्ति होती है। शङ्खतीर्थमें स्नान करनेवाला मनुष्य दुर्गतिमें नहीं पड़ता। कोटितीर्थमें गोता लगाकर मानव सम्पूर्ण तीर्थोंका फल पाता है। धनुष्कोटितीर्थमें विधिपूर्वक स्नान करनेवाला पुरुष बन्धनोंसे मुक्त हो जाता है। गायत्री तथा सरस्वतीतीर्थमें स्नान करनेवाला पुरुष पापसे मुक्त हो जाता है। ऋणमोचनतीर्थ आदिमें स्नान करके मनुष्य सब प्रकारके ऋणसे छूट जाता है। शुभे! इस प्रकार मैंने सेतु (सेतुबन्ध रामेश्वर)-के तीर्थोंका माहात्म्य बताया है, जो पढ़ने और सुननेवाले पुरुषोंके सब पापोंका नाश कर देता है।
नर्मदाके तीर्थोंका दिग्दर्शन तथा उनका माहात्म्य
**मोहिनी बोली—**द्विजश्रेष्ठ! मैंने सेतुतीर्थका उत्तम माहात्म्य सुन लिया। अब नर्मदाके तीर्थ-समुदायका वर्णन सुनना चाहती हूँ।
**पुरोहित वसुने कहा—**मोहिनि! मैं नर्मदाके दोनों तटोंपर विद्यमान तीर्थोंका वर्णन करता हूँ। उत्तर तटपर ग्यारह और दक्षिण तटपर तेईस तीर्थ हैं। नर्मदा और समुद्रके संगमको पैंतीसवाँ तीर्थ कहा गया है। ॐकार-तीर्थके दोनों ओर अमरकण्टक पर्वतसे दो कोस दूरतक सब दिशाओंमें साढ़े तीन करोड़ तीर्थ विद्यमान हैं। एक करोड़ तीर्थ तो कपिलासंगममें हैं। अशोकवनिकामें एक लाख तीर्थ प्रतिष्ठित हैं। अङ्गारगर्तके सौ और कुब्जाके दस हजार तीर्थ कहे गये हैं। वायुसंगममें सहस्र और सरस्वतीसंगममें सौ तीर्थ स्थित हैं। शुक्ल-तीर्थमें दो सौ, विष्णु-तीर्थमें एक हजार तीर्थ हैं। माहिष्मतीमें एक सहस्र और शूलभेद-तीर्थमें दस हजार तीर्थोंकी स्थिति मानी गयी है। देवग्राममें एक सहस्र और उलूक-तीर्थमें सात सौ तीर्थ हैं। मणि नदीके संगममें एक सौ आठ तीर्थ हैं। वैद्यनाथमें एक सौ आठ और घटेश्वरमें भी उतने ही तीर्थ हैं। नर्मदा-समुद्र-संगममें डेढ़ लाख तीर्थोंका निवास बताया गया है। व्यासद्वीपमें अट्ठासी हजार एक सौ तीर्थ हैं। करञ्जासंगममें दस हजार आठ तीर्थ हैं। एरण्डीसंगममें एक सौ आठ तीर्थ हैं। धूतपाप-तीर्थमें अड़सठ और कोकिलमें डेढ़ करोड़ तीर्थ हैं। नरेश्वरि! रोमकेशमें सहस्र, द्वादशार्कमें सहस्र तथा शुक्ल-तीर्थमें आठ लाख दो हजार तीर्थ हैं। सभी संगमोंमें एक सौ आठ तीर्थोंकी स्थिति मानी गयी है। कावेरी-संगम या नन्द-तीर्थमें पाँच सौ अवान्तर तीर्थ हैं। भृगुक्षेत्रमें एक करोड़ और भारभूतमें एक सौ आठ तीर्थ विद्यमान हैं। अक्रूरेश्वरमें डेढ़ सौ और विमलेश्वरमें एक लाख तीर्थ हैं। शुभानने! सूर्यके दस, कपिलके नौ, चन्द्रमाके आठ और नन्दीके एक करोड़ आठ तीर्थ हैं। स्तवकोंमें दो सौ चौदह तीर्थ हैं। ये सब