नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 134, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंपरीक्षा में खरा उतरने वाले व्यक्ति भी 'घटारोही' के रूप में लोक में प्रतिष्ठा एवं प्रसिद्धि प्राप्त करता है। 'घट' को धर्म के पर्यायवाची शब्द के रूप में ही ग्रहण किया जाता है। घट-तुला के साथ हेराफेरी अथवा बेईमानी करने वाले के सम्बन्ध में 'सरस्वती विलास' ग्रन्थ में लिखा है- ब्रह्मघ्नेये स्मृता लोका ये लोकाः कूटसाक्षिणः। तुलाधारस्य ते लोकास्तुलां धारयतो मृषा॥ ब्रह्महत्या और मिथ्यासाक्ष्य देने वाले के समकक्ष ही तुला के साथ बेईमानी जघन्य पाप है। इन सब अपराधों का एक-समान भयंकर दण्ड मिलता है। त्वं वेत्सि सर्वभूतानां पापानि सुकृतानि च। व्यवहाराभिशस्तोष्यं मानवस्तुल्यते त्वया॥ 278॥ घट-तुला के समय विनम्र शब्दों में प्रार्थना करनी चाहिए-तुलादेव! तुम सभी प्राणियों के पाप-पुण्यों को भली प्रकार जानते हो, व्यवहार में अभिशस्त मनुष्य आपके द्वारा तुलित होता है, आप उसकी वास्तविकता के ज्ञाता हो, हमें उस सत्य से परिचित कराने की कृपा करो। देवासुरमनुष्याणां सत्ये त्वमतिरिच्यसे। त्वं तुले सत्यधामासि पुरा देवैर्विनिर्मिता॥ 279॥ तुलादेव! सत्य-ज्ञान तथा उसके प्रकाशन के सम्बन्ध में तो आप देवों से भी आगे हो। आप सत्य के धाम एवं अधिष्ठान हो। पूर्वकाल में देवों की रचना के समय ही आपकी भी रचना हुई थी-ऐसी लोकमान्यता है। तत्सत्यं वद कल्याणि संशयान्मां विमोचय। यद्यहं पापकर्मास्मि तदा त्वं मामधो नय॥ 280॥ अभियुक्त को तुला पर आरूढ़ होने से पूर्व प्रार्थना करनी चाहिए-तुलादेव! आप सत्य के ज्ञाता हो, मेरे सत्य को प्रकाशित करके मुझ पर लगे लाञ्छन से मुझे मुक्त करो। मुझे सन्देह के आवरण से बाहर निकालो। यदि मुझसे अनजाने में कोई पाप हो गया हो, तो उसके लिए मुझे क्षमा प्रदान करो। मुझे लोक में अपमानित होने से बचा लो। आप तो भली-भांति जानते हैं कि मैंने जान बूझकर कोई अपराध नहीं किया और फिर अनजाने में हो गये किसी कर्म पर मेरा वश नहीं है। इस प्रकार आप मेरी सहायता एवं रक्षा करो। शुद्धं चैवं विजानासि तत ऊर्ध्वं गृहाण माम्। तदेनं संशयारूढं धर्मतस्त्रातुमर्हसि॥ 281॥ यदि आप मुझे निष्पाप एवं निर्दोष मानते हैं, तो मेरे भार को हल्का करते हुए मुझे ऊपर उठाने की कृपा करें। सन्देह और संशय का केन्द्र बने मेरे सम्मान की