भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 212, कुल 304 में से

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न स्यात् क्षेत्रं विना सस्यं न वा बीजं विनास्ति तत्। अतोऽपत्यं द्वयोरिष्टं पितुर्मातुश्च धर्मतः ॥ ५९ ॥ वस्तुतः क्षेत्र के बिना वीर्याधान नहीं किया जा सकता और वीर्याधान के बिना खेत खाली पड़ा रहता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि कृषि उपज पाने के लिए दोनों— खेत और बीज—के समान महत्त्व के अनुरूप ही स्त्री (खेत) और पुरुष (वीर्य) का अथवा शालीन भाषा में माता-पिता का एक-समान महत्त्व है। नान्यपत्यं परगृहे संयुक्तस्य स्त्रिया सह। दृष्टं संग्रहणं तज्ज्ञैर्नागतायाः स्वयं गृहे ॥ ६० ॥ दूसरे के घर में जाकर पराई स्त्री से सम्भोग करते हुए पकड़ा जाने वाला पुरुष अवश्य दण्डनीय है, परन्तु अपने घर स्वयं आयी, पराई स्त्री से सम्भोग करते हुए पकड़े गये पुरुष को दण्डित नहीं करना चाहिए। अदुष्टत्यक्तदारस्य क्लीबस्य क्षयिकस्य च। सेच्छानुपैयुषो दारामदोषः साहसे भवेत् ॥ ६१ ॥ स्त्री के किसी दोष अथवा अपराध के बिना उसका त्याग करने वाले—स्त्री के असुन्दर, अनाकर्षक अथवा मलिन होने के कारण अथवा पुरुष की किसी अन्य स्त्री में अनुरक्ति-आसक्ति के कारण उससे विरक्त—क्लीब तथा असाध्य रोगग्रस्त, अर्थात् उसकी इच्छा से मैथुन करने वाले—पुरुष को दोषी नहीं मानना चाहिए। वस्तुतः ऐसी स्त्री को तृप्त-सन्तुष्ट करना, तो भूखे को भोजन खिलाने और प्यासे को जल पिलाने के समान एक प्रकार का पुण्यकर्म है। यह तो पुरुष का दयाभाव भी हो सकता है। परस्त्रियां सहाकालेऽदेशे वा भवतोमिथः। स्थानसम्भाषणा मोदास्त्रयः संग्रहणक्रमाः ॥ ६२ ॥ असमय—रात के अंधेरे में, अस्थान—निर्जन वन में, घर के एकान्त में अथवा किसी गुप्त स्थान (झाड़ियों के पीछे, सूने पड़े दुर्ग आदि) में, 1. पराई स्त्री के साथ घूमना, फिरना, उठना-बैठना, 2. बातचीत करना तथा 3. हास्य विनोद करना अपराध है। इन तीनों क्रियाओं को ही पकड़ा जाना कहा जाता है। ऐसा करते हुए युवक युवती देखने वालों की दृष्टि में आने से बचने की चेष्टा करते हैं। नदीनां संगमे तीर्थेष्वारामेषु वनेषु च। स्त्रीपुंसौ यत्समैयातां तच्च संग्रहणं स्मृतम् ॥ ६३ ॥ दूसरों की दृष्टि से बचने के लिए स्त्रियों और पुरुषों का गुपचुप एक-दूसरे से निम्नोक्त स्थानों पर मिलना भी संग्रहण—पकड़े जाने से बचने का प्रयास— कहलाता है।

  1. नदियों का संगम स्थल प्रयाग आदि, 2. तीर्थ स्थल (हरद्वार आदि), 3 210 / नारदस्मृति