नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंउत्तम भक्ष्य पदार्थों तथा अन्यान्य उपहारों का आदान प्रदान करता देखकर, उन दोनों की परस्पर अनुरक्ति का अनुमान लगाना चाहिए। दर्पाद्वा यदि वा मोहाच्छ्लाघया वा स्वयं वदेत्। ममेयं भुक्तपूर्वेति तच्च संग्रहणं स्मृतम्॥ ६९॥ किसी युवक प्रेमी द्वारा दर्प तथा मोहवश अथवा मिथ्या आत्म-विज्ञान की इच्छा से प्रेरित होकर किसी युवती को अपनी 'भुक्ता' कहने का अर्थ, उसकी उसे पाने की उत्कट अभिलाषा ही समझना चाहिए। युवती को अन्य उपायों से पाने में असफल युवक कभी कभी उसे अपमानित-कलंकित करने से ही पाना सम्भव मानकर ऐसी ओछी हरकतें करते हैं। वस्तुतः इसे युवक प्रेमी की कुण्ठा और निराशा की परिणति ही समझना चाहिए; क्योंकि वह समझता है कि वश में नहीं आती, तो मिथ्या आरोप लगाने में क्या बुराई है। वैसे, इस प्रकार के हताश प्रेमी को ओछा व्यक्ति ही समझना चाहिए। सजात्यतिशये पुंसां दण्ड उत्तमसाहसः। मध्यमस्त्वानुलोम्येन प्रातिलोम्ये प्रमापणम्॥ ७०॥ समान वर्ण, जाति और स्थिति के व्यक्तियों द्वारा स्त्रियों पर मिथ्या आरोप लगाकर, उन्हें वश में करने की चेष्टा करने पर युवक को उत्तम साहस का दण्ड और उच्च वर्ण, जाति एवं स्थिति के पुरुष द्वारा अपने से निम्न जाति, वर्ण एवं स्थिति की स्त्री को मिथ्या कलंकित करने पर मध्यम साहस का दण्ड देना चाहिए। निम्न वर्ण जाति वाले युवक प्रेमी द्वारा अपने से उच्च वर्ण-जाति की युवती को अनुचित रूप से अपमानित करने पर पुरुष को मृत्यु-दण्ड दिया जाना चाहिए। कन्यायामस्कामायां द्वयाङ्गुलस्यावकर्तनम्। उत्तमार्या वधस्त्वेव सर्वं संग्रहणं तथा॥ ७१॥ हीन अथवा समान वर्ण, जाति तथा स्थिति की कन्या की इच्छा के विरुद्ध उसकी योनि को अंगुलि से अथवा लिंग से आहत करने वाले पुरुष के हाथ की दो अंगुलियां काट डालनी चाहिए। अपने से उन्नत वर्ण-जाति की स्त्री से बलात्कार करने वाले से न केवल उसकी सारी सम्पत्ति छीन लेनी चाहिए, अपितु उसे मृत्यु दण्ड भी देना चाहिए। सकामायां तु कन्यायां सङ्गमे नास्त्यतिक्रमः। किन्त्वलंकृत्य सत्कृत्य स एवैनां समुद्वहेत्॥ ७२॥ कन्या की इच्छा एवं सहमति से उससे मैथुन करने वाला पुरुष दोषी नहीं माना जाता। हां, पुरुष को अपने द्वारा भोगी गयी कन्या को समुचित आदर देते हुए, उसे सजा-धजा कर उससे विवाह कर लेना चाहिए। टिप्पणी—विवाह पूर्व प्रेमी से यौन सम्बन्ध रखने वाली कन्या को तो 212 / नारदस्मृति