भारतकोश
नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)

Narada Smriti with Hindi Translation

देवर्षि नारद द्वारा

स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished304 पृष्ठ

पृष्ठ 24, कुल 304 में से

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पृष्ठ 24

अनुसार—'हिरण्यमग्निरुदकमिति एतान्यपि प्रत्यक्षदेवतास्वरूपाणि।' हिरण्य का एक अन्य अर्थ राष्ट्रीय मुद्रा—धन की देवी—लक्ष्मी भी लिया जाता है। इन देवों के समक्ष व्यक्ति द्वारा मिथ्याभाषण न करने की सम्भावना बढ़ जाती है—ऐसी प्राचीन परम्परागत मान्यता प्रचलित रही है। व्यवहार के निम्नोक्त अठारह पद हैं, अर्थात् इन विषयों पर झगड़ा होने की स्थिति में मुकद्दमा चलाया जा सकता है— ऋणादानं ह्युपनिधिः सम्भूयोत्थानमेव च। दत्तस्य पुनरादानमशुश्रूषाभ्युपेत्य च॥ 16 ॥ वेतनस्यानपाकर्म तथैवास्वामिविक्रयः। विक्रियासम्प्रदानं च क्रीत्वानुशय एव च॥ 17 ॥ समयस्यानपाकर्म विवादः क्षेत्रजस्तथा। स्त्रीपुंसयोश्च सम्बन्धो दायभागोऽथ साहसम्॥ 18 ॥ वाक्पारुष्यं तथैवोक्तं दण्डपारुष्यमेव च। द्यूतं प्रकीर्णकं चैवेत्यष्टादशपदः स्मृतः॥ 19 ॥ एषामेव प्रभेदोऽन्यो द्वात्रिंशदधिकं शतम्। क्रियाभेदान्मनुष्याणां शतशाखो निगद्यते॥ 20 ॥

  1. ऋण के लेन-देन से सम्बन्धित विवाद।
  2. उपनिधि—धरोहर को न लौटाने तथा उसमें गड़बड़ी करने से सम्बन्धित।
  3. सम्भूयसमुत्थान—संयुक्त श्रम के फल का विभाजन।
  4. किसी को दिये गये पदार्थ को उससे वापस मांगना।
  5. सेवा का वचन देकर सेवा न करना।
  6. वेतन लेकर सेवा न करना अथवा सेवा लेकर वेतन न चुकाना।
  7. किसी वस्तु का स्वामी न होने पर भी उसे बेचना।
  8. किसी वस्तु को बेचकर क्रेता को न देना।
  9. किसी वस्तु को ख़रीदकर (सौदा करके) क्रेता द्वारा मुकर जाना अथवा सामान न उठाना।
  10. पाखण्ड-खण्डन।
  11. भूमि सम्बन्धी विवाद।
  12. स्त्री-पुरुष के सम्बन्धों में दरार सम्बन्धी विवाद।
  13. दाय-भाग (भाइयों में पैतृक सम्पत्ति के विभाजन) सम्बन्धी विवाद।
  14. साहस—डाका, बलात्कार।
  15. दण्डपारुष्य (मार-पीट करना अथवा बन्दी बनाना)
  16. वाक्पारुष्य-गाली-गलौच करना। 22 / नारदस्मृति