नारद स्मृति (हिन्दी अनुवाद सहित)
Narada Smriti with Hindi Translation
देवर्षि नारद द्वारा
स्रोत: चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन · चौखम्बा सुरभारती प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 269, कुल 304 में से
संदर्भ में पढ़ेंगृहे वै मुषिते राजा चौरग्राहकांस्तु दापयेत्। आरक्षकान् राष्ट्रिकांश्च यदि चौरो न लभ्यते ॥ 18 ॥ घर में हुई किसी चोरी के अपराधी चोर के न पकड़े जाने पर गृहस्वामी को चोर को पकड़ने के लिए व चोरी न होने देने के लिए नियुक्त सिपाहियों— चौकीदारों, सीमा पर नियुक्त प्रहरियों तथा राज्य-रक्षा के लिए नियुक्त अधिकारियों— से चोरी के सामान की भरपाई करनी चाहिए। यदि वा दोषकर्तैष तस्मिन्मोषे तु संशयः। मुषितः शपथं दाप्यो मोषे वै शुद्धिकारणात् ॥ 19 ॥ चोरी की रिपोर्ट के झूठा होने का सन्देह उत्पन्न होने पर रिपोर्ट लिखाने वाले को आड़े हाथों लेना चाहिए और सत्य की गहरी छानबीन करनी तथा सम्बद्ध व्यक्ति से शपथपत्र (ऐफ़िडेविट) लिखवाना चाहिए। रिपोर्ट के झूठा सिद्ध होने पर सम्बद्ध व्यक्ति को अभियुक्त मानकर दण्डित करना चाहिए। अचौरै बोधितो मोषं चौरो वै शुद्धकारणात्। चौरे लब्धे लभेयुस्ते द्विगुणं प्रतिपादिताः ॥ 20 ॥ चोर न होने पर, सन्देह के कारण चोरी के आरोप में पकड़े गये व्यक्ति को अपने को निर्दोष सिद्ध करने के लिए प्रमाण जुटाना पड़ता है। वास्तविक चोर के पकड़े जाने पर सन्देह में पकड़े गये व्यक्ति को क्षतिपूर्ति के रूप में चुराये द्रव्य के मूल्य का दुगुना दिया जाता है। चौरहृतं प्रपद्यैव स्वरूपं प्रतिपादयेत्। तदभावे तु मूल्यं स्याद्दण्डं दाप्यश्च तत्समम् ॥ 21 ॥ चोरी का माल जिस रूप में पकड़ा जाता है, उसी रूप में सरकार के सामने प्रस्तुत करना चाहिए। चोर के पकड़े जाने पर, परन्तु चोरी के माल के न मिलने पर चोर से चोरी के माल का दाम और उतना ही जुर्माना वसूल करना चाहिए। काष्ठकाण्ड तृणादीनां मृण्मयानां तथैव च। वेणुवैणवभाण्डानां वेतसस्यास्थिचर्मणोः ॥ 22 ॥ शाकहरितमूलानां हारणे तृणपुष्पयोः। गोरसेक्षुविकाराणां तथा लवणतैलयोः ॥ 23 ॥ पक्वान्नानां कृतान्नानां मद्यानामामिषस्य च। सर्वेषामल्पमूल्यानां मूल्यात् पञ्चगुणो दमः ॥ 24 ॥ निम्नोक्त अल्पमूल्य वस्तुओं की चोरी करने वालों के पकड़े जाने पर उनको चुरायी वस्तु के दाम का पांच गुना अर्थ-दण्ड (जुर्माना) के रूप में चुकाना पड़ता है—
- लकड़ी, 2. घास-फूस, 3. कुश और काना—लेखनी के रूप में प्रयोग में नारदस्मृति / 267